प्यार इस तरह भी तो….

प्यार सिंह ‘प्यार, शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र।

वजूद तो दूर, साये को भी छूने की जुर्रत नहीं
प्यार इस तरह भी तो किया जाता है
मिलना-मिलाना इससे भी मुझे को सरोकार नहीं
प्यार इस तरह भी तो किया जाता है
तू अपनी दुनिया में मस्त, मैं अपने में गाफिल
प्यार इस तरह भी तो….
यू ही कभी किसी सफर में मिल भी जाओ अगर
कोई फर्क नहीं मुस्करा देना या सर झटक कर निकल जाना
प्यार इस तरह भी तो….
हां तमन्ना है इक बार देखूं तुझे चरागों के बुझने से पहले
दीया बुझने के बाद भी गर तू आये तो कोई बात नहीं
प्यार इस तरह भी तो….
ना बदन, ना रूह, ना तेरा साया छूने की चाहत मुझे
हां तमन्ना है तितली बन तेरी परछाई से गुजर जाऊं
प्यार इस तरह भी तो….
बेहद नाजुक है दिल में कैसे कैद करके रखूं उसे
तमन्ना है सतरंगी सपनों में सजाकर सारा जहां घुमा लाऊं
प्यार इस तरह भी तो….
तेरी परछाई से न गुजर सकूं तो कोई बात नहीं
तूझे सारा जहां न घुमा सकूं तो कोई बात नहीं
बिना दीदार दुनिया से चला जाऊं तो कोई बात नहीं
फिर किसी जनम में मिले न मिलें तो कोई बात नहीं
प्यार इस तरह भी तो….
दुनिया में बिछुड़ने से ही तो है मिलने के इत्तेफाक का वजूद
बिछड़न की कोई शिकन तेरे माथे पर मंजूर नहीं मुझे
इससे तो अच्छा है बिना मिले ही मैं तुझसे बिछुड़ जाऊं
प्यार इस तरह भी तो….

रूप महल, प्रेमगली, अथाह सागर।

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