अखिल भारतीय कूर्मि क्षत्रिय महासभा, अन्य कूर्मि संगठनों और पिछड़े, दलित व अल्पसंख्यक संगठनों में आपसी सामन्जस्य की अपील

कूर्मि कौशल किशोर आर्य, शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र।

काफी महानुभाव देश के कूर्मि समाज के सभी शाखाओं, उपजातियों को कूर्मि समाज के विकास और मजबूती के लिए जागरूक और संगठित कर रहे हैं। देश कूर्मि के समाज के मित्र उत्तर भारत से दक्षिण भारत और पूर्व भारत से पश्चिम भारत के कूर्मि समाज के सभी लोग विभिन्न शाखाओं, उपजातियों, सरनेम,टाईटल में बंटे हुए हैं, जिसके कारण आज भी हमारे कूर्मि समाज के मित्रों की आपस में जान -पहचान, नजदीकी और सुख दुःख में भागीदारी नहीं हो पा रही है। आपस में असंगठित रहने के कारण देश के कूर्मि समाज के लोगों और अन्य पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक समाज पर आय दिन विभिन्न राज्यों में लगातार विभिन्न अत्याचार और अन्याय किये जा रहे हैं, जो बहुत ही दुःखद और शर्मनाक है। हमारे आपस के झगड़े के कारण धूर्त और अपराधी किस्म के लोगों द्वारा लगातार विभिन्न प्रकार के अत्याचार और अन्याय किये जा रहे हैं, फिर भी कूर्मि समाज व अन्य पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक समाज के जागरूक और जिम्मेदार मित्र और विभिन्न कूर्मि संगठनों के पदाधिकारी गण व विभिन्न जातियों के पदाधिकारी गण इस गम्भीर विषय पर ध्यान नहीं देकर आपस में लड़ रहे हैं।
निश्चित रूप से अगर 126 वर्ष पुराने 1894 ई में स्थापित कूर्मि समाज के संगठन “अखिल भारतीय कूर्मि क्षत्रिय महासभा ” देश के पंचायत, वार्ड से जिला, मंडल और जिला से लेकर राज्य और राज्य से लेकर राष्ट्रीय स्तर पर विभिन्न परोपकारी और जाति के विकास और मजबूती के लिए काम नहीं करके अपने अपने पदों पर कुंडली मारकर बैठे रहें तो इसकी सारी गलती और जिम्मेदारी अ भा कूर्मि क्षत्रिय महासभा के पूर्व और वर्तमान पदाधिकारियों की बनती है। जिसके लिए देश के विभिन्न राज्यों के कूर्मि मित्रों को अधिकार है कि वे महासभा के पूर्व और वर्तमान पदाधिकारी गण से सवाल करें कि उन्होंने महासभा के पदाधिकारी बनकर अपने लम्बे समय के कार्यकल में कौन कौन, कहाँ कहाँ, कैसे कूर्मि समाज के विकास और मजबूती के लिए क्या काम किये हैं? कूर्मि समाज के मित्र जब तक यह सिलसिला शुरु नहीं करेंगे और यह सोचेंगे कि ” मैं क्यों करू यह काम कोई और कूर्मि कर देगा ” तब तक महासभा समेत अन्य कूर्मि संगठनों के बेकार, कामचोर और गैरजिम्मेदार लोग कूर्मि समाज के विभिन्न संगठनों के पदों पर पदाधिकारी बनकर बिना काम किये कुंडली मारकर बैठे ही रहेंगे और निजी स्वार्थ को प्राथमिकता देते रहेंगे।
         यूपी समेत देश के अन्य राज्यों में भी हमारे कूर्मि समाज के लोगों समेत अन्य पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक समाज के लोगों की ऐसी ही स्थिति है, जो आजकल हमारे असंगठित रहने के कारण परिस्थिति में बदल चुकी है। अन्य पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक 90% समाज की जिसमें हमारा कूर्मि समाज भी शामिल हैं, उनकी भी यही स्थिति है। कारण हम 90% के मूलनिवासी समाज के लोग बहुसंख्यक बहुजन मूलनिवासी होकर भी विदेश युरेशियन को अपना कीमती वोट देकर ब्राह्मण और सवर्ण जाति के धूर्त और बेईमान किस्म के लोगों को जिताकर लोकसभा, विधान सभा समेत अन्य विभिन्न सदनों में भेजते हैं और उन्हीं सदियों से विभिन्न अत्याचार और अन्याय करने वाले लोगों से अपने लिए न्याय, अधिकार और सुविधाएं देने के लिए भीख मांगते हैं, यह बिडंबना नहीं तो और क्या है!? इसीलिए आज वक्त की यही मांग है कि अखिल भारतीय कूर्मि क्षत्रिय महासभा का एकीकरण करके देश के सभी कूर्मि संगठनों का विलय महासभा में करते हुए मजबूती प्रदान करते हुए देश के अन्य पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक समाज के लोगों के साथ आपसी सामन्जस्य बनाकर मिलकर संगठित होकर अपनी सरकार बनाई जाये, देश के सभी सदनों पर अधिकार किया जाये और 90% पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक समाज के शोषित पीड़ित वर्ग के लोगों के पहले विकास करके समाज के मुख्य धारा में लाया जाये फिर 10% के सवर्ण जाति के लोगों पर ध्यान दिया जाये। हाँ, देश में कही भी 10% सवर्ण जाति और 90% मूलनिवासी समाज पर अत्याचार और अन्याय किये जाने पर समान न्याय की व्यवस्था कायम की जाये, ताकि देश के किसी नागरिक को असुरक्षा व अन्याय के भाव महसूस नहीं हो सके ।
 एक कहावत है :-” घर फूटे गंवार लूंटे” ( घर के फूटने, आपस के कलह, झगड़े में गंवार, मुर्ख,  दूसरे लोग घर को लूटने की, आपस के कलह के कारण फायदा उठाते हैं।) कूर्मि समाज के कुल गौरव छत्रपति शिवाजी महाराज, छत्रपति राजर्षि शाहूजी महाराज और लौहपूरुष सरदार वल्लभ भाई पटेल समेत सभी महान विभूतियों ने एकता, संगठन, आपसी सहयोग, प्रेम, सदभाव, सौहार्द, भाईचारा और शांति का संदेश दिया। फिर क्यों हमलोग उन महान विभूतियों को जन्मदिन और पुण्यतिथि पर याद तो करते हैं, उन्हें श्रद्धा सुमन तो अर्पित करते हैं पर उनके बतायें रास्तें पर चलते नहीं है, आखिर क्यों? याद रखिए चाहें घर -परिवार हो या जातीय -समाजिक संगठन या राजनैतिक दल या फिर कोई अन्य स्थान, सभी स्थानों पर एकता, आपसी संगठन, त्याग,समर्पण=(प्रेम), सहयोग, सदभाव, सौहार्द और शांति की ही महत्ता है, इसीलिए अपने एकता, संगठन को किसी भी कीमत पर बिखंडित होने नहीं दे। वर्तमान में आपके हमारे घर-परिवार, समाज में जो भारतीय परंपरागत पहचान संयुक्त परिवार व्यवस्था का जो बिखंडन हुआ है, वह दरअसल नैतिकताहीन, अर्थहीन और दोषपूर्ण शिक्षा नीति, अहंकार, असहनशीलता और एकता -संगठन के टूटने /बिखंडित होने के कारण हुई है।
      तो आईए! हम लोग मिलकर महासभा समेत देश के अन्य कूर्मि संगठनों को एकीकरण और विलय करने की कोशिश करते हुए अन्य पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक के साथ मिलकर संगठित होकर सामन्जस्य बनाकर सत्ता पर अधिकार करें।
 संस्थापक राष्ट्रीय समता महासंघ, सह राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी अखिल भारतीय कूर्मि क्षत्रिय महासभा

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