मित्र

वाणी बरठाकुर “विभा”, शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र।

मैं मन का विश्वास हूँ ।
मैं ही दिलों की आस हूँ ।।
मैं सबका मददगार हूँ ।
मैं सभी पर निसार हूँ ।।
मैं किसी का सहारा  हूँ ।
मैं अपनों से हारा हूँ  ।।
मैं सच्चाई का पालक हूँ ।
मैं साथ  का वाहक  हूँ  ।।
मैं जीवों में निहित गुण हूँ ।
मैं विनम्रता के चरण हूँ   ।।
मैं निस्वार्थ में बसता हूँ  ।
मैं नफरत दूर करता हूँ ।।
मैं परिभाषा प्रेम की हूँ ।
मैं साथ में पिता की हूँ  ।।
मैं दुःख में राहत हूँ  ।
मैं मन का चाहत हूँ ।।
मैं मन का पुस्तक हूँ ।
मैं खुद में परिपूरक हूँ ।।
मैं सूरज- किरण में हूँ ।
मैं चांद- चांदनी में हूँ ।।
मैं बिजली-  बादल  हूँ ।
मैं माँ का  आँचल हूँ  ।।
मैं रजनी में नींद सजाता हूँ ।
मैं हर रिश्तों में रहता  हूँ  ।।
मैं आईने का प्रतिरूप  हूँ ।
मैं पानी प्यासे स्वरूप  हूँ ।।
मैं राधा-कृष्ण के बीच हूँ ।
मैं राम सुग्रीव के बीच हूँ ।।
मैं राम जाम्बुवन्त में हूँ ।
मैं सुदामा – कृष्ण में हूँ  ।।
मैं कृष्ण -अर्जुन में हूँ ।
मैं कर्ण-दुर्योधन में हूँ ।।
मैं खून के रिश्ते से ऊपर हूँ।
मैं सुख का आधार हूँ  ।।
मैं घाव भी सहलाता हूँ ।
मैं मित्र कहलाता हूँ  ।।
तेजपुर, असम

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