नेताजी का भाषण (लघुकथा)

मुकेश कुमार ऋषि वर्मा, शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र।

राष्ट्र और इंसानियत के लिए दिखावा करने वाले नेता जी ने मंच से जोशीला भाषण झाड़ना शुरू किया, ‘मित्रों ! मैं ये देश किसी भी हालत में बिकने नहीं दूंगा । अपने देश के नागरिकों का सिर झुकने नहीं दूंगा ।’

भाषण सुन रहे लोगों ने तालियां बजाना शुरू कर दिया । तालियों की गड़गड़ाहट बंद हुई तो एक तेज आवाज आई, ‘रोज-रोज राष्ट्र की संपत्ति और तमाम सरकारी विभाग उद्योगपतियों को बेचे जा रहे हैं । यह क्या है…? सीमा पर आए दिन चीन -पाक नीचता दिखाते हैं वो क्या है ?’

आवाज सुनकर नेता जी शांत हो गये । उन्होंने अपनी लाल-लाल आंखें घुमाईं… सात-आठ पालतू जानवर भीड़ में घुस गये और उस व्यक्ति को खोजने लगे जिसने लाईव नेता जी की फिल्म बना दी । अचानक आक्रोशित भीड़ ने जूते -चप्पलें मंच की ओर उछालना शुरू कर दिया …।

ग्राम रिहावली, डाकघर तारौली गुर्जर, फतेहाबाद (आगरा) उत्तर प्रदेश

 

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