दर्द की सज़ा

राजीव डोगरा ‘विमल’, शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र।

हुआ न दर्द
मुझे भी हुआ करता था,
जब तुम बेमतलब
मुझे तकलीफ देते थे।

आए न आंखों में आंसू
मेरी आंखों में भी आते थे,
जब तुम बिना मेरे कुछ बोले
मुझे दर्द दिया करते थे।

टूटा न दिल
मेरा भी टूट जाता था,
जब तुम पास होकर भी
अनजान बन निकल जाते थे।

हुई न तकलीफ
मुझे भी हुआ करती थी,
जब तुम औरों के लिए
मुझे छोड़ चले जाते थे।

भाषा अध्यापक गवर्नमेंट हाई स्कूल ठाकुरद्वारा कांगड़ा हिमाचल प्रदेश

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