हँसी

अ कीर्ति वर्द्धन, शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र।

किस हँसी की बात करते हो ?

बच्चों की हँसी मासूम लगती है,
दुष्टों की हँसी नासूर बनती है।

कुछ हँसते हैं फकत जलाने के वास्ते,
क़ातिल की हँसी से दहशत उपजती है।

देखा है हँसते हुए दरिंदों को यहाँ पर,
नेताओं की हँसी से, शै-मात झलकती है।

53 महालक्ष्मी एंक्लेव मुजफ्फरनगर, उत्तर प्रदेश

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