बदलते हुए बिहार का लोकप्रिय चेहरा हैं नीतीश कुमार

आशुतोष, शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र।

बदलते हुए बिहार का लोकप्रिय चेहरा हैं नीतीश कुमार। अपने दृढ़ विश्वास से लवरेज होकर बेदाग दमदार काम का बखान अपने शब्दों में करते हैं। कौन भूल सकता है 1990 के दशक वाले बिहार को, जहाँ संसाधनो की कमी नहीं,  फिर भी बिजली पानी को तरसता था बिहार। आज हर तरफ रोशनी है सडक, पानी और सुविधाएँ भी है। एक नये युग और और विकास की पटरी पर तीव्रगति से बढ़ रहा यह राज्य पर्यटन में भी अपनी पहचान बना चुका है। यूँ ही नही कोई कुमार बन जाता जनता के साथ तालमेल और सुख सुविधाओं से जन-जन तक पहुँचाना कहा है सब के बस में। यही एक विकल्प है, जो एक बार फिर नीतीश कुमार को मुख्यमंत्री की कुर्सी तक लेकर जाएगी।
सुशासन और बेदाग छवि के धनी के आगे अब सारे विकल्प बौने साबित हो रहे है। लंबे राजनीतिक अनुभव और कार्यकुशलता पुनः उनकी ओर आकर्षित हो रही है। विरोधी खेमा में उनका तोड़ न होना सारे विकल्पों पर भारी है। उन्होने उन तमाम मुद्दों को रखा, जो उनके कार्यकाल में बिहार को एक नई दिशा दी है। न्याय के साथ विकास के अन्तर्गत सुशासन की एक अलग छवि जनमानस पटल पर रखने में वे अभी तक सफल रहे हैं। आज तक उनकी बोलने की छवि भी एक सटीक वक्ता के तौर पर मेच्योर रही है। पर्यावरण विकास, सात निश्चय और कुरीतियों के खिलाफ उनकी सार्थक पहल अब जमीं पर दिखने लगी है, जिसमें शराब बंदी प्रमुख है। शराब बंदी से समाज में एक शकून का माहौल बना है। कोई चोरी छिपे अगर पीता भी है तो वह प्रदर्शन नहीं करता, जिससे रोड पर छींटाकशी और आपराधिक मामलो में कमी आयी है। यह उनकी ही देन है। बाल विवाह दहेज प्रथा जैसे मामलो में भी सुधार की ओर बिहार बढ़ रहा है।
बिहार की धरती कृषि उत्पादन के लिए जानी जाती है। बिहार के किसानो की हालत 2005 के मुकाबले आज समृद्ध होती दिख रही। यहाँ के किसान फल सब्जी मक्का गेहूँ और धान के साथ मत्स्य दूध का उत्पादन करते हैं, जो देश के सभी हिस्सो में अब पहुँचने लगी है। अभी भी काफी कार्य इस दिशा में करने होगे, जिसका जिक्र करना लाजिमी है। कोल्ड स्टोरेज की व्यवस्था के साथ वृहत बाजार और फसल बीमा के क्षेत्र में काफी सुधार की आवश्यकता है, क्योंकि यहाँ कही बाढ़ तो कहीं सुखाड़ की स्थिति लगातार बनी रहती है। उद्योग जगत के लिए भी निवेशको के लिए उचित माहौल तैयार करना यहाँ एक चुनौती से भरा रहा है, जिसका प्रयास सुशासन के जरिये ही हो सकता है। सरकार इस दिशा में भी आगे बढ़ रही है। रोड पुलिया पुल बडे शहरो मे बडे बडे फ्लाईओवर ब्रीज आज इस बात की गवाही बने है कि सरकार अपनी तय सीमा के अन्तर्गत कार्य कर रही है। साधन सीमित हो और आसमान फटा हो तो एक बार में दूरूस्त होना संभव नही है, इसके लिए लगातार और सभी सरकारो को मिलकर काम करना होगा। बिहार की बुनियादी ढ़ाँचा काफी बिगड़ा हुआ था, जिसे पटरी पर लाना आसान नही था, पर अपने कुशल अनुभव और नेतृत्व की वजह से वे एक पाक साफ छवि के साथ विगत पंन्द्रह साल बिहार के लोगो को समर्पित कर दिया यह इतिहास सदा उनके कार्यो का ऋणी रहेगा।
शिक्षा के क्षेत्र में भी उनके द्वारा लायी गयी साइकिल योजना, मध्यान्न भोजन योजना, पोशाक राशि से साक्षरता दर बढी और स्कूलो में उपस्थिति भी। यह चिंता का विषय जरूर रहा है कि आज भी शिक्षा की हालत अच्छी नही मानी जाती, लेकिन सरकार के स्तर पर प्रयास किए गये हैं। जब आप परीक्षा देते है तो एक बार में सफल हो जाये ये जरूरी नही, इसलिए बार-बार देते है। सरकार भी प्रयास करती रही है, देखना होगा कब तक सफलता हाथ लगती है। भूमि विवाद भी यहा की एक अहम और झंझट पैदा करने वाली समस्या रही है, जिसके निदान के लिए सरकार के स्तर पर समय समय पर भू हथबन्दी कानून में बदलाव होते रहे है, यह प्रक्रिया आज भी जारी है ।
बिहार की फिजाओं में चुनावी विगुल बज चुका है। आने वाले दिनो में सभी पार्टीयां  रैली में अपनी अपनी जगह तालाब रहे हैं। पटना का ऐतिहासिक गाँधी मैदान शायद इन दिनों  व्यस्त हैं। जहाँ सभी अपने-अपने तर्क दें रहे हैं, लेकिन एक छवि जो अपनी पहचान छोड जाते हैं, वह जन मानस को आने वाले समय में तय करने का अवसर जरूर देते रहेंगे कि इस राज्य का सिंहासन किसे सौंपा जाय। तर्क-विर्तक के इस सभा में उन तमाम पहलुओ पर मतदाता अपने आप को कहाँ और किसके साथ खड़ा करते है। यह आने वाला वक्त तय करेगा, लेकिन जहाँ साफ छवि की बात होगी सुशासन की बात होगी नीतीश कुमार सबसे पहले आएँगे।
 पटना, बिहार

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