यूकेडी खेल प्रकोष्ठ के केंद्रीय अध्यक्ष विरेन्द्र सिंह रावत का दर्द

शि.वा.ब्यूरो, देहरादून। उत्तराखंड मे मुख्यमंत्री बदलते रहो, रबड़ से मिटाते रहो और नया नाम लिखते रहो। 20 साल 13 मुख्यमंत्री! वाह रे हमारी किस्मत, यहाँ क्या मुख्यमंत्रियों की दुकान खुल गई है? उक्त उदगार उत्तराखंड क्रांति दल खेल प्रकोष्ठ के केंद्रीय अध्यक्ष व अनगिनत इंटरनेशनल, नेशनल और स्टेट अवार्ड से सम्मानित विरेन्द्र सिंह रावत ने व्यक्त किये।
श्री रावत का कहना है कि हमने 1994 मे अलग राज्य के लिए आन्दोलन इसलिए किया था कि हमें अलग राज्य चाहिए था, जिससे की हम मूल सुविधाओं से वंचित न रहे। अपना पानी, बिजली हो। पहाड़ के हर व्यक्ति के पास रोजगार हो, चिकित्सा हो, शिक्षा हो, जिससे किसी को पलायन न करना पड़े। कुमाउनी, गढ़वाली, जौनसारी, गोर्खाली आदि  मूलनिवासियों को उनका हक़ मिले। मुजफ्फरनगर का रामपुर तिराहा कांड हुआ। खटीमा, मसूरी, करनपुर, श्रीयंत्र कांड हुआ, जिसमें बहुत से महिला, बालक युवा व प्रौढ़ पुरुषों ने अपना बलिदान दिया, महिलाओ की अस्मिता से खिलवाड़ हुआ। हजारों उत्तराखंड आन्दोलनकारियो को मौत के घाट उतार दिया गया था। सरकार की नजर मे 42 शहादत हुई थी, लेकिन शहीदों कि संख्या इससे काफी अधिक थी। हम खुद इस आन्दोलन के गवाह थे, हमारा घर धरमपुर जो उस वक़्त अति सवेन्दनशील स्थान था। उत्तराखंड राज्य की मांग ने जनसैलाब खड़ा कर दिया था। हर घर, हर कोने से एक ही आवाज़ थी। आज दो, अभी दो, उत्तराखंड राज्य दो। इतने संघर्षो के बाद हमें उत्तराखंड राज्य मिला था, लेकिन इन 20 साल मे कांग्रेस और बीजेपी ने बारी-बारी से लूट लिया। आज उत्तराखंड राज्य पर 70000 करोड़ रूपये का कर्ज और 100,000 रूपये के घोटाले हमारी उपलब्धि है।
विरेन्द्र सिंह रावत ने कहा कि उत्तराखंड क्या इसलिए बनाया था कि 20 साल बने 13 मुख्यमंत्रियों को जीवन भर पालने के लिए हर साल करोड़ो का खर्च आम जनमानस को झेलना पड़े।

Related posts

Leave a Comment