जैसे ही धामी ने मुख्यमंत्री की शपथ ली वैसे ही ……..

सुनील वर्मा, शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र।

कल जैसे ही धामी ने मुख्यमंत्री की शपथ ली, वैसे ही उत्तराखंड की मीडिया ने फिर से पहाड़ी और नॉन पहाड़ी अधिकारियों को अपने निशाने पर ले लिया था। आज इसी के पहले शिकार के रूप में उत्तराखंड के प्रमुख सचिव ओमप्रकाश की छुट्टी कर दी गई। अब उनकी जगह 1984 बैच के आईएएस अफसर एनएचएआई के चैयरमैन एसएस संधू को सरकार का प्रमुख सचिव नियुक्त किया जा सकता है। हालाकि संधू साहब भी नॉन पहाड़ी ही है।
 सवाल फिर से वही है कि जब उत्तराखंड का मानस और मीडिया अपने स्वार्थ सिद्धि के चलते किसी भी नॉन पहाड़ी अधिकारियों को अपना दुश्मन समझता है और मैदानी आदमी को बर्दाश्त करने के लिए तैयार ही नही है तो फिर ये गलती किसी मैदानी को फिर से प्रमुख सचिव पद देकर क्यो की जा रही हैं? क्या कुछ दिन बाद ही इन संधू साहब का भी विरोध शुरू होगा? मै तो कहता हूँ कि उत्तराखंड की मीडिया और जनमानस जो मैदानी अधिकारी और मैदान के लोगो के खिलाफ इतना जहर उगलते है, इन सब को इक्ठ्ठा होकर एक बार फिर से रामपुर तिराहे से ही एक जन आदोलंन शुरू कर देना चाहिए और जितने भी मैदानी इलाके उत्तराखंड में हैं, उन्हे वापस उत्तरप्रदेश में शामिल करने की मांग करनी चाहिए। फिर वो चाहे हरिद्वार हो, उधम सिंह नगर हो या अन्य जो भी मैदानी इलाके उत्तराखंड की सीमा में लगते है। उन सब को वापस यूपी में मिलाने की वकालत उत्तराखंड की मीडिया को दिल्ली से करनी चाहिए, ताकि हमेशा के लिए ये मैदानी और पहाड़ी राग का टंटा ही खत्म हो सके।
शाम होती नही कि नशे की झांझ में मैदानी-पहाड़ी राग अलपाकर अखबारो के कालम भरने शुरू कर देते हो, अगर इतनी ही नफरत है मैदान के लोगो से तो केन्द्र सरकार से मांग क्यो नही करते कि यहां सिर्फ पहाड़ के रहने वाले लोगो को ही तैनाती मिलनी चाहिए, ताकि तुम्हारा पूर्ण पहाड़ी राज्य का सपना साकार हो सके। अब तो केन्द्र में भी वही सरकार है, जिसने उत्तराखंड को मान्यता दी थी।
कभी कुंमाऊनीयों को बर्दाश्त नही करेगें, कभी मैदानियों को बर्दाश्त नही करेगें, कभी ब्राह्मणो को बर्दाश्त नही करेगें, कभी अधिकारियो को बर्दाश्त नही करेगें।
पूरे प्रदेश का बंटाधार तो खुद कर दिया। उत्तराखंड की सारी धरती को अवैध खनन करके जख्मी कर दिया। 18-19 साल में खुद एक अदत मुख्यमंत्री तक नही दे पाये, जो 5 साल तक का कार्यकाल पूरा कर पाता और ठीकरा मैदानी अधिकारियों के सर पर फोड़ने को तैयार रहते हो।
अरे! हम उत्तरप्रदेश वालो से ही कुछ सबक ले लो कि उतराखंड में पैदा हुए व्यक्ति को पिछले 5 साल से प्रदेश का मुख्यमंत्री बनाकर आँखो पर बैठा रखा है और अभी 5 साल तक और कही न जाने देने का दृड़ संकल्प सारे प्रदेश की जनता ने एक सुर में कर लिया है और एक तुम हो, जो गिनती के दो-चार मैदानी अधिकारियों को भी नही झेल पा रहें हो, कमाल है।
लेखक एक वरिष्ठ और स्वतंत्र पत्रकार है 

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