यह अलग बात है

डॉ. अ कीर्तिवर्धन, शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र।

मेरे गाँव में इस बरस भी सूखा पडा,
यह बात मैंने अखबारों में पढ़ी।
यह अलग बात है कि
इस बरसात में ही
फुलवा की झोपड़ी बह गई,
बिरजू के घर की दीवार ढह गई,
जिसके नीचे दबकर
उसकी माँ मर गई।
गाँव का एक मात्र प्राइमरी स्कूल
दस दिन से बंद है,
बरसात से परेशान लोगों के लिए
वह ही तो आश्रय स्थल है।
कुछ अधिकारियों ने सूखा ग्रस्त गाँव का दौर किया है,
यह खबर भी मैंने अखबारों में ही पढ़ी।
यह अलग बात है कि
सारा गाँव पानी की वजह से
हर और से कटा है।
पानी की कमी से
धान की फसल सूख गई है,
नईम खान की बेवा
भूख से मर गई है,
ईलम हरिजन की भैंस भी
प्यासी ही चल बसी है।
गाँव में भारी तबाही है,
सूखे से किसानों की जान पर बन आई है,
अधिकारियों ने सरकार से
सहायता की गुहार लगाई है।
यह खबर भी अखबारों में ही
प्रमुखता से आई है।
यह अलग बात है कि
मेरे गाँव में
किसी नईम खान का घर नहीं है,
इलम हरिजन के पास
भैंस तो क्या
रहने को छप्पर भी नहीं है।
सरकार ने
अधिकारियों की रिपोर्ट पर चिंता जताई है,
सहायता हेतु
भारी भरकम सामग्री जुटाई है,
मुवावजा भी देना तय भरपूर है,
चुनाव का मामला सामने हुजुर है।
सूखे की समस्या से अवगत कराने के लिए
मंत्री जी का दौरा
निर्धारित किया गया है,
ठहरने के लिये उनके
शहर में प्रबन्ध किया गया है।
गाँव के प्रधान से
पूरा ब्यौरा लिया गया है,
रहत सामग्री का वितरण भी
मंत्री जी ने स्वयं किया है,
अखबार में इस आशय का
मय फोटो समाचार छपा है।
यह अलग बात है
प्रधान को बदले में फिर से
टिकट का आश्वासन दिया गया है।
राहत सामग्री को बेच  दिया गया है,
मंत्री जी के स्वागत में जश्न मनाया गया है,
कल तक जो मुख्य अधिकारी
बदनाम हो गया था,
मंत्री जी की सेवा कर
अभयदान हो गया है।
यह खबर भी अखबार में ही आई है
मंत्री जी ने
उस अधिकारी की कर्त्तव्य निष्ठा की बात
पत्रकारों को सुनाई है।
यह अलग बात है कि
अब अखबारों में
झूठी खबरों को पढ़ते -पढ़ते
मेरी आँखें
पथराने लगी हैं,
मेरी जुबान को भी लकवा मार गया है,
सारे देश को
भ्रष्टाचार का बुखार हो गया है।
मुज़फ्फरनगर, उत्तर प्रदेश

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