लाक डाउन में उपयोगी नवाचार हैं डाॅ मसानिया के चालीसा

बच्चूलाल दीक्षित, शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र।

प्राचीन काल में ऋषि-मुनियों ने आदिशक्ति के विभिन्न स्वरूपों की आराधना संस्कृत में श्लोकों द्वारा तथा हिन्दी भाषा में चालीसा द्वारा करने की लोकप्रिय गायन विधा विकसित की। इसमें कुल चालीस चौपाइयाँ तथा प्रारम्भ और अंत में दोहा अनिवार्य हैं। इन्हें देवता या अपने आराध्य की स्तुति में गाया जाता था। संक्षेप में पूरे जीवन की प्रशंसात्मक उपलब्धियों की  ये रचनाएं बहुत ही उच्चस्तरीय  थीं, जिसमें हनुमान चालीसा, शिव, गणेश, दुर्गा, राधा, राम आदि का नाम लिया जा सकता है। कालांतर में निम्नस्तरीय व्यंगकारों ने व्यंग के लिए चालीसा की पवित्र विधा को कलंकित करने का असफल प्रयास किया है। उदाहरणार्थ पत्नी चालीसा, मच्छर चालीसा लालू चालीसा आज ऐसी कई रचनायें हैं, जो सिर्फ व्यंगात्मक हैं।
वेद वाक्य है धर्म, संस्कृति, साहित्य की रक्षा के लिए विभूतियों का प्रादुर्भाव होता है। उसी क्रम में हिन्दी साहित्य की चालीसा विधा की पवित्रता बनाए रखने में मां भारती की प्रेरणा स्वरूप  डॉ दशरथ मसानिया प्रकाश में आए, जिन्होंने  चालीसा के माध्यम से देव स्तुति के अलावा शैक्षणिक नवाचार से दुनिया भर के छात्र जगत को लाभान्वित किया है। जिन्हें गूगल, फेसबुक, यूट्यूब, पत्र-पत्रिकाओं में भी देखा जा सकता है। उनके  चालीसा गायन से शिक्षा जगत में ऐसा रचनात्मक कार्य पहली बार देखने को मिला है, जिसके फलस्वरूप घर-घर, गांव-गांव , जन-जन तक शैक्षणिक नवाचार का बातावरण बना है। 50 से अधिक चालीसा लोगों के कंठाहार बने हैं। हम अध्ययन की सुविधा की दृष्टि से इन्हें पांच भागों में बांट सकते हैं।
1  धार्मिक:- इसमें  गुरु चालीसा, शनिदेव चालीसा, मां बगलामुखी, बाबा बैजनाथ ,पहेली, माताजी, रामायण,प्रजापति दक्ष,श्रीराम ,श्रीकृष्ण ,हरदोल लला, गुरु नानकदेव,गोवर्धन , रामदेवरुणाजा, भगवान बुद्ध, आदि समाहित है।
2  शैक्षणिक—  इसमें आगर, हिंदी ,संस्कृत ,गणित, व्याकरण, निर्वाचन,गणित दोहावली, भाषा , गद्य दोहावली, पर्यायवाची , विलोम शब्द ,कहावत /मुहावरे, इतिहास ,विज्ञान, योग टिपानिया,शिक्षक, परीक्षा आदि महत्वपूर्ण है ।
3 -महापुरुष–  डाॅ भीमराव चालीसा,अटल बिहारी, आदि शंकराचार्य, स्वामी विवेकानंद, तरुण सागर महाराज, महात्मा गांधी, महाराणा प्रताप ,दयानंद सरस्वती आदि के नाम लिए जा सकते हैं ।
4 क्रीड़ा संबंधी — इसमें क्रिकेट, सचिन तेंदुलकर, योग चालीसा आदि शामिल किये जा सकते हैं।
5  महिला सशक्तिकरण–इसमें देवी अहिल्या बाई,बेटी बुधिया, माता चालीसा, श्रृंगार पच्चीसा और बेटी चालीसा प्रमुख है।
         छात्रजगत में मसानिया जी के चालीसा पहली पसंद बने हैं जिनके माध्यम से उपर्वर्णित शैक्षणिक विषयों  को आत्मसात करने में सुगमता के साथ रोचकता विकसित हुई है।
अपेक्षा है वर्तमान की शिक्षा प्रणाली में चालीसा विधा नवाचार की पृष्ठभूमि पुष्ट करेगी साथ ही समाज में नव चेतना का संचार करेगी।
सेवा निवृत्त प्राचार्य भिंड, म. प्र.

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