कांग्रेस व भाजपा नहीं देश में वक्त की मांग है तीसरा विकल्प

कूर्मि कौशल किशोर आर्य, शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र।

यूपी के हाथरस में बलात्कार व हत्या की पीडी़ता मनीषा बाल्मीकी और उनके परिवार को लगता नहीं कि न्याय मिल पायेगा और अपराधियों को कठोर सजा मिल पायेगी क्योंकि सारी कोशिश स्थानीय प्रशासन और यूपी की आदित्यनाथ सरकार अपराधियों को बचाने में लगी हुई है। प्रशासन कह रही है कि मनीषा के साथ बलात्कार नहीं हुआ! तो फिर क्या मनीषा झूठ बोल रही है? उसके गर्दन की हड्डी उस बेटी ने खुद तोड ली ? उसने हत्या भी अपनी खुद कर ली? उसने अपना अंतिम संस्कार भी खुद ही कर लिये? ब्यान बदलने और केस वापस करने के लिए दबाव उसने माता पिता पर खुद लगाई? ये सारे कुकृत्य तो बलात्कारी और हत्यारे अपराधियों द्वारा किये गये और उसमें अपराधियों को बचाने के लिए पूरी ताकत प्रशासन लगाकर अपने अधिकार का दुरूपयोग कर रही है जो कहीं से भी न्यायसंगत नहीं है। वैसे भी यह कोई पहली घटना नहीं है जहाँ प्रशासन सरकार के दबाब में काम रही है। इसके पूर्व हजारों घटनाएं हो चुकी है जहाँ प्रशासन ने आदीत्यनाथ जनविरोधी पक्षपाती, ब्राह्मणवादी, सामन्तवादी सरकार के दबाब में पीडित /पीडी़ता परिवार को न्याय नहीं दिलाकर उन्हें हैरान, परेशान और प्रताड़ित की है। उन्नाव के कुशवाहा समाज की बेटी से भाजपा विधायक कुलदीप सिंह सेंगर ने बलात्कार करने के बाद उनके पिता को थाने में गम्भीर रूप से मारकर घायल कर दिया जिनका इलाज के दौरान मृत्यु हो गयी। उनके चाचा को आर्म्स ऐक्ट में जेल भेजा गया। बाद में कोर्ट जाते समय पीड़िता और उनके वकील समेत अन्य परिजनों को ट्रक से कार में टक्कर मारकर हत्या की कोशिश की गई।
प्रतापगढ़ के पट्टी विधान सभा गोविन्पुर और एक अन्य गाँव में कूर्मि समाज के किसान परिवार के खेत में यूपी के मंत्री समर्थक ब्राह्मण अनिल तिवारी और उसके सहयोगी द्वारा मवेशी छोड़कर फसल को चराकर बर्बाद किये जाने पर जब कूर्मि किसान परिवार ने उन्हें रोका तो करीब डेढ़ दर्जन कूर्मि किसान परिवार के घरों को आग लगाकर उनके घरों के अनाज, मवेशी व अन्य कीमती समान जला कर राख कर दिये गये, कुछ कीमती समानों को पास के कुएं में फेंक दिया गया, तो कुछ तोड़ फोड़ करके बर्बाद कर दिये गये, घरों के टाईल्स, दरबाजें, खिड़की, दुकानें, बक्सें तक को तोड़ दिये गये तो कुछ कीमती समान लूट लिये गये, महिलाओं की इज्ज़त लूटने की कोशिश की गई, बच्चों व पुरुषों के साथ गम्भीर रूप से मार पीट की गई और उल्टा पुलिस प्रशासन ने गम्भीर रूप से घायल कूर्मि समाज के किसान परिवार के 11 लोगों को जेल भेज दिया ।इसके साथ ही पिंटू पटेल की हत्या, प्रियंका पटेल,निषाद समाज कुशवाहा समाज, धोबी समाज बेटी के साथ बलात्कार समेत इसके अलावा यूपी में हर दिन पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक समाज के लोगों बलात्कार और हत्या समेत अन्य संगीन अपराध के शिकार बनाये जा रहे हैं पर कामचोर, पक्षपाती, ब्राह्मणवादी व अत्याचारी आदीत्यनाथ हाथ पर हाथ धरे बैठी देखती रहती है। ऐसी बेशर्म सरकार को एक दिन भी सत्ता में बने रहने का कोई अधिकार नहीं है।

गुजरात में कभी केशुभाई पटेल जी के मुख्यमंत्री रहते भूकम्प आने पर नरेन्द्र मोदी जी ने साजिश करके उन्हें मुख्यमंत्री से हटवाकर खुद गुजरात के मुख्यमंत्री बन बैठे थे और उसके बाद केशुभाई पटेल जी को ऐसा डंसा कि राजनीति में सक्रिय होने नहीं दिया। यूपी में पिछड़े वर्ग के नेता केशव प्रसाद मौर्या के पेट में छुरा घोंपकर मुख्यमंत्री बने आदित्यनाथ सत्ता संभालने के साथ ही पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक समाज के सक्रिय विभिन्न सामाजिक संगठनों व दलों के स्थानीय नेताओं की चुन चुन कर हत्या कराने व इस समाज के आम लोगो को विभिन्न तरह से कुछ सवर्ण जाति के आपराधिक किस्म के लोगों द्वारा विभिन्न अत्याचार और अन्याय के शिकार बनाये जा रहे हैं पर प्रशासन और यूपी सरकार पीड़ित /पीडी़ता परिवार को न्याय दिलाने और अपराधियों को कठोर सजा दिलाने में पूरी तरह पक्षपात अत्याचार और अन्याय के शिकार लोगों को प्रताड़ित और अपराधियों को बचाने का काम कर रही है। यह यूपी समेत देश दुनियां के लोग देख समझ रहे हैं। पर यह आदित्यनाथ मुख्यमंत्री की जवाबदेही संभालने की बात तो दूर एक सन्यासी और योगी होने के धर्म और कर्तव्य भी नहीं निभा रहे हैं। इस तरह आदित्यनाथ अपने नाम के साथ योगी लगाकर और शरीर पर गेरूआ सन्यासी के वस्त्र धारण करके उस योगी नाम और गेरूआ वस्त्र का भी अपमान कर रहे हैं। आदित्यनाथ के पक्षपाती, ब्राह्मणवादी,सामन्तवादी और गैरजिम्मेदाराना तथा एक सन्यासी /योगी के कर्तव्यों के निर्वहन नहीं करने के कारण उन्हें अपने नाम के साथ योगी जैसे पाक, शुद्ध, महान शब्द (उपाधी) लगाने और गेरूआ वस्त्र धारण करने का कोई अधिकार नहीं है। क्योंकि कोई भी सन्यासी, योगी कभी ब्राह्मणवादी, पक्षपाती, सामन्तवादी नहीं होते, सन्यासी/

योगी तो जगत के सभी मानव व प्राणियों की सेवा और उनका कल्याण चाहने वाले तथा कल्याण करने वाले होते हैं। ऐसे में एक सन्यासी के वस्त्र धारण करके और अपने नाम के साथ आदित्यनाथ योगी लगाकर किस मानव /प्राणी के लिए कहाँ, कैसा, किस तरह सेवा या कल्याण कर रहे हैं यह बहुत विचारणीय सवाल है!?
हर वास्तविक सही सन्यासी /योगी माया-मोह, छल -कपट, ईर्ष्या -द्वेष, बदला -प्रतिकार,मान-अपमान,दिखावा,शासन,सत्ता ,भौतिक सुविधाओं से दूर ही रहते हैं और पूरी तरह अध्यात्म में लीन रहकर ध्यान लगाकर ज्ञान प्राप्त करके उस ज्ञान को विश्व के भलाई के लिए उपदेश देते हैं और मानव समेत सभी प्राणियों के कल्याण के लिए काम करते हैं। आदित्यनाथ इनमें से कौन से काम मानव और अन्य प्राणियों के कल्याण के लिए करते हैं यह यूपी की जनता समेत देश दुनियां के लोग देख समझ ही रहें हैं!? उसके बाद भी भाजपा आला कमान द्वारा आदित्यनाथ को यूपी के मुख्यमंत्री बनाने की भूल करना और सभी मोर्चा पर फेल हो जाने के बाद भी आदित्यनाथ को यूपी के मुख्यमंत्री बनाये रखना बहुत बड़ा सवाल खड़ा करता है!? बड़ी बडी़ बातें करने के लिए प्रसिद्ध आदित्यनाथ के पास भी इतनी नैतिकता नहीं है कि अपने नकामियों के कारण नैतिक जिम्मेदारी लेकर मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देकर एक सही इंसान या एक वास्तविक सन्यासी /योगी की जिम्मेदारी निभाये!
कभी नरेंद्र मोदी जी को अमेरिका ने गोधरा नरसंहार कांड में उचित कदम नहीं उठाये जाने पर आने अमेरिका आने से प्रतिबंधित कर दिया था। आज वही नरेंद्र मोदी जी भारत की 85% पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक समाज के भोली भाली जनता के वोट के सहारे भारत के प्रधानमंत्री पद पर आसीन होकर पिछडे, दलित और अल्पसंख्यक समाज के विरोध और उनके हकमारी में काम कर रहे हैं। और आरक्षण समाप्त करने के लिए सभी प्रमुख सरकारी उपक्रम को बेचकर निजीकरण कर रहे हैं। झूठा राष्ट्र वाद और अन्य बेकार के मुद्दे में जनता को उलझाकर 2014 के लोकसभा चुनाव जीतने के बाद 2019 के लोकसभा चुनाव जीतने के लिए पुलबामा जैसे आतंकी हमले के आर में चुनाव जीतने के लिए विभिन्न हथकंडा अपनाकर दुबारा वापसी करते हैं। हर तरह से सबल और सम्पन्न करीब 15% आबादी वाले सवर्ण जाति को बिना किसी आयोग गठन और सिफारिश के 10 % आरक्षण देने के लिए कानून बनाते हैं, सवर्ण जाति को सलाना 8 लाख रुपये आय तक टैक्स में छुट और अन्य पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक समाज को सलाना 5 लाख रुपये तक में ही टैक्स में छुट ऐसी दोहरी रणनीति आखिर क्यों!? वर्षों से राजस्थान के गुर्जर, पंजाब, हरियाणा के जाट, महाराष्ट्र के मराठा, गुजरात के पाटीदार समेत अन्य विभिन्न पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक समाज के लोगों द्वारा आबादी अनुसार आरक्षण की मांग किये जाते रहने पर भी ना कांग्रेस मांगे पूरी की और ना ही भाजपा की मोदी सरकार ने मांगे पूरी की। पर सिर्फ मुट्ठी भर 15% से भी कम आबादी वाले सवर्ण जाति को आनन फानन में 4 दिनों के अंदर बिना किसी आयोग गठन और सिफारिश के मोदी सरकार ने आखिर कैसे और क्यों आरक्षण का कानून बना दिया ? और इसके लिए उसने संविधान के मूल में संशोधन करके आर्थिक शब्द जोड़ दिया। जबकि संविधान में पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक समाज के लोगों को आगे बढाने के लिए सामाजिक रूप से पिछड़ेपन कारण बताकर आरक्षण के प्रावधान किये गये थे। वर्षों तक पिछडे़ को आरक्षण देने के लिए काका कालेकर और बीपी मंडल आयोग की सिफारिश को पूरी तरह लागू नहीं किये गये और भाजपा की मोदी सरकार ने भी नहीं लागू की। भारत में पिछडे़,दलित और अल्पसंख्यक समाज के 85% बहुजन समाज को उनके आबादी के अनुसार आरक्षण देने की मांग वर्षों से लगातार उठाये जा रहे हैं पर हमारी सरकार को इसकी कोई चिंता नहीं। वर्षों से जातीय आधारित जनगणना कराने की मांग उठ रही है इसके लिए बिहार की नीतीश कुमार की जदयू सरकार ने तो दो दो बार बिहार विधान सभा में प्रस्ताव पारित करके केन्द्र की मोदी सरकार को भेज चुकी है पर इस पर कोई भी ध्यान मोदी सरकार नहीं दे रही है। भारत में 1931 ई के बाद कोई भी जातीय जनगणना नहीं कराई गई है। अभी तक जो भी आंकडे /समीकरण बनते हैं वह 1931 के जातीय जनगणना के अनुसार ही बनते हैं। दर असल कांग्रेस हो या भाजपा दोनों ही ब्राह्मणवादी,सामन्तवादी मानसिकता के राजनैतिक राष्ट्रीय दल हैं। यह दोनों ही दल बिल्कुल ही नहीं चाहती कि भारत के पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक समाज के विभिन्न जातियों को उनकी सही आबादी का पता चले क्योंकि उन्हें डर है कि वे जातियाँ आबादी के अनुसार आरक्षण,राजनैतिक प्रतिनिधित्व समेत अन्य विभिन्न सुविधाओं के लिए मांग करेगी और तब कांग्रेस व भाजपा जैसे ब्राह्मणवादी,
सामन्तवादी मानसिकता वाले राजनैतिक दलों के सवर्ण जाति के लोगों को ज्यादा सांसद,विधायक व अन्य जनप्रतिनिधि चुने जाने में बहुत कठिनाई होगी। इसी डर से कांग्रेस व भाजपा जैसे राजनैतिक दल जातीय जनगणना कराने को टाल रही है।

  हमारा देश भारत बेरोजगारी, बेकारी, महंगाई, किसानों की विभिन्न समस्याएं, चिकित्सा के क्षेत्र में नये संसाधनों की कमी, भुखमरी,नक्सली समस्या, बढ़ते बलात्कार-हत्या समेत देश बहुत सारे विभिन्न समस्याओं से गुजर रही है। पर केन्द्र की मोदी सरकार और भाजपा की अन्य राज्यों की सरकार जनता के कल्याण के लिए उपयोगी फैसले नहीं लेकर जनता के विरोध और देश के विरोध में लगातार फैसले ले रही है। नरेन्द्र मोदी जी लगातार पानी पी पी कर पिछली कांग्रेस की सरकार और नेहरु -गाँधी परिवार दोष दे रहे हैं। पर जब नरेंद्र मोदी जी को जनता ने बहुमत दिया तो जनता की व देश की समस्याओं के समाधान करने और विकास करने के लिए दिया है। जनता के समस्याओं के समाधान और देश के विकास करने की जगह देश के प्रधानमंत्री मोदी जी पिछली सरकार को कोसकर समय और ऊर्जा बर्बाद करे यह बिल्कुल भी शोभनिय और उचित नहीं है। मोदी जी मन की बात करते हैं, पर जनता की समस्याओं और देश के विकास के मुद्दे पर बात नहीं करते हैं इसके लिए मोदी जी पिछली कांग्रेस सरकार को दोषी ठहराते हैं यह कैसी समझ, कैसी मानसिकता है? यह हमारे देश की भोली भाली जनता समझ नहीं पा रही है!? इसीलिए भारत की भोली भाली जनता ने मोदी जी, आर एस एस के झांसा में आकर, मोदी जी के सब्जबाग, सपने दिखाने, झूठे वादे करने के जाल में फंसकर व झूठे राष्ट्र वाद के नारें में फंसकर दूसरी बार 2019 में भी भाजपा को केन्द्र में सरकार बनाने के लिए बहुमत दे दिया। 
   पर अब देश की जनता को भाजपा और नरेन्द्र मोदी जी से मोह भंग हो गया है। पर यह भी सच है कि भाजपा, आर एस एस और नरेंद्र मोदी जी जनता के रुख को भाप /समझ रहे हैं इसीलिए भाजपा अपने शातिर दिमाग /तंत्र का इस्तेमाल करके भाजपा जनता के मूड को अपने पक्ष में करने और देश की जनता के वोट को गोलबंद करने के लिए नये नये हथकंडें अपनाते हैं और इसी हथकंडें , साजिश में देश की जनता भ्रमित हो जाती है और भाजपा के समर्थन में वोट गोलबंद हो जाता है। दर असल देश की आज़ादी में आर एस एस का कोई भी योगदान नहीं है यह सर्वविदित है। आर एस एस का गुप्त ऐजेंडा भारत के पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक समाज के 85%बहुजन समाज को फिर सदियों पहले की तरह गुलाब बनाने की है जो इस वर्ग को आजादी मिलने के बाद भारत के संविधान ने दिये हैं। पर आर एस एस व भाजपा इस पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक समाज को दिये गये अधिकार को पचा नहीं पा रही है और इसीलिए उसे समाप्त करने के लिए सभी सरकारी कंपनियों, उपक्रम को बेचकर निजीकरण करके अपने पसंदीदा पूंजीपतियों को फायदा पहुंचाने की लगातार कोशिश कर रही है। निजीकरण दर असल आरक्षण समाप्त करने की साजिश है क्योंकि प्राइवेट सेक्टर में तो आरक्षण लागू नहीं है। आईएएस स्तर के 60%  पदों पर अपने लोगों को डारेक्ट बिना किसी परीक्षा के नियुक्तियाँ कर रही है। मणिपुर, गोवा, कर्नाटक में बहुमत नहीं मिलने पर भी भाजपा ने कैसे दूसरे दलों के विधायकों को लालच देकर अपने पाले में करके उन राज्यों में सरकार बनाई है यह सर्वविदित ही है। मध्य प्रदेश में पुर्ण बहुमत की कमलनाथ कांग्रेस की सरकार को कैसे गिराकर अपनी सरकार बनाई है यह भी सर्वविदित ही है। जिसका खामियाजा मध्य प्रदेश की जनता वहाँ होने वाले विधान सभा के उप चुनाव में अवश्य देगी। भाजपा ने अपने 25 वर्षों के सबसे विश्वस्त और महाराष्ट्र में सहयोगी शिवसेना,बंगाल में तृणमूल कांग्रेस, आन्ध्र प्रदेश में तेलगूदेशम पार्टी के प्रमुख चन्द्र बाबू नायडू, यूपी में अपना दल एस प्रमुख अनुप्रिया पटेल , पंजाब में शिरोमणि अकाली दल के साथ जो दगाबाजी की है यह भी सर्वविदित ही है। बिहार में अपने पुराने सहयोगी जदयू और मुख्यमंत्री माननीय नीतीश कुमार जी को कमजोर करने के लिए पहले उनके करीबी उपेन्द्र कुशवाहा जी, जीतनराम मांझी जी को भाजपा ने 2014 के लोकसभा चुनाव और 2015 के विधान सभा चुनाव में अपने पाले में किया और अभी बिहार में होने जा रहे बिहार विधान सभा चुनाव में चिराग पासवान को आगे करके भाजपा नीतीश कुमार जी को बिहार की सत्ता से उखाड़ फेकना चाहती है ताकि महाराष्ट्र की गत विधान सभा चुनाव में शिवसेना को धोखा देने जैसे धोखा देकर बिहार में भाजपा अपना मुख्यमंत्री बना सकें। इसके अलावा अपने भाजपा के प्रमुख नेताओं में सर्वश्री :- मा. उमा भारती जी ,कल्याण सिंह जी,विनय कटियार जी, संतोष गंगवार जी, आनन्दीबेन पटेल जी, प्रह्लाद पटेल जी, जसवन्त सिंह जी, यशवन्त सिन्हा जी,शत्रुघ्न सिन्हा जी, कीर्ति झा आजाद जी, रामजेठमलानी जी और विश्व हिंदू परिषद के अन्तर्राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष माननीय डाॅ प्रवीण भाई तोगरिया जी को भी किनारे लगा चुकी है। इसीलिए ऐसे नेताओं और राजनैतिक दलों से भारत की जनता को बहुत सावधान रहने की जरूरत है। 
    हमारे देश भारत की जनता को अमेरिकी जनता की तरह बहुत जागरूक ,बुद्धिमान और जिम्मेदार होना होगा तभी भाजपा  जैसी जनविरोधी, देश विरोधी, पक्षपाती,ब्राह्मणवादी,

,सामन्तवादी मानसिकता वाली दलों से देश को छुटकारा मिल सकेगा। हमारे देश के लोगों को किसी नेताओं व सरकारों के द्वारा जन विरोधी और देश विरोधी फैसले लेने पर या किसी तरह के प्रशासन और सरकार द्वारा अत्याचार और अन्याय किये जाने पर सोचने समझने तथा जागरुक होकर विरोध करने के लिए सड़कों पर उतरने में महीनों लग जाते हैं जबकि अमेरिका में ऐसा नहीं है। अमेरिका की जनता वहाँ की सरकार द्वारा गलत काम किये जाने पर रातों रात अपना काम, घर- बार छोड़कर बीना भेदभाव किये सड़क पर संगठित होकर उतरकर सरकार व प्रशासन के खिलाफ विरोध करते हुए सड़क,चक्का जाम करके व्हाइट हाउस घेर लेती है।जिसका प्रत्यक्ष प्रमाण अभी हाल ही में अमिरीकी पुलिस द्वारा एक अश्वेत व्यक्ति (काले व्यक्ति ) को गिरफ्तार करने और उसकी पुलिस कस्टडी में मार पीट के कारण मौत हो जाने से पूरा अमेरिका लोगो ने रातों रात व्हाइट हाउस को घेर लिया और अमेरिकी पुलिस और सरकार को घुटनों के बल माफी मांगने और दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई करने के आश्वासन देने के बाद जनता शांत हुई । पर हमारे देश भारत जो बहुत बड़ा लोकतांत्रिक देश है यहाँ कभी ऐसा नहीं होता है,क्योकि अमेरिका के नागरिक की तरह भारत की जनता जागरूक, बुद्धिमान, समझदार नहीं है, उन्हें अपने स्वाभिमान व अधिकार की चिंता नहीं रहती है। दूसरे भारत की जनता विभिन्न वर्ग, जाती, समुदाय, धर्म में बंटे हुए हैं और आपस में बहुत भेदभाव है। इसी असंगठित रहने के फायदे देश के नेता और सरकार उठाते रहे हैं। इसीलिए सरकार चाहे कांग्रेस की रहें या फिर भाजपा की भारत की जनता को हर हाल में बुद्धिमान, जागरूक ,संगठित और सावधान रहना चाहिए तभी वह अपने अधिकारों की लड़ाई लड़ने में सफल हो पाएंगे।

     देखा जाए तो क्या भाजपा और क्या कांग्रेस दोनों राष्ट्रीय दलों की लगभग एक समान मानसिकता /स्थिति है। कांग्रेस की भी कमोवेश यही स्थिति है। दोनों ही राष्ट्रीय दल पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक समाज के 85% बहुजन समाज के विकास और अधिकार के लिए लिए विरोधी ही है। वरना कांग्रेस चाहती तो आबादी के अनुसार भारत के 85% पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक समाज के विकास और मजबूती के लिए सकारात्मक, रचनात्मक धरातल पर कार्य कर सकती थी। पर पिछले वर्षों के ज्यादातर सालों में सत्ता में रहने के बावजूद उसने बहुसंख्यक बहुजन समाज को ठेंगा ही दिखाया है। एक सरकार 1989-90 में तीसरे विकल्प के रूप में जनता दल आई। पर उस जनता दल को बाहर से समर्थन दे रही भाजपा ने साढे़ चार वर्ष में 4 प्रधानमंत्री दबाब देकर बदलवाये थे जिनमें :- माननीय सर्वश्री बीपी सिंह जी, एचडी देवेगौडा़ जी, इन्द्र कुमार गुजराल जी, चन्द्र शेखर जी। उस सरकार को बाहर से समर्थन दे रही भाजपा ने पूरा परेशान कर दिया और अंत में कार्यकाल पूरा होने के करीब 7 माह पहले फिर से समर्थन वापस लेकर केन्द्र की जनता दल सरकार को गिरा दिया और इस तरह देश में 7 माह पहले लोकसभा चुनाव कराना पड़ा। ऐसे हैं भाजपा के करतूत जिसने बीपी सिंह की सरकार द्वारा पिछड़े वर्ग को 27% आरक्षण लागू किये जाने पर बाहर से समर्थन दे रही जनता दल सरकार को गिरा दिया था। वही भाजपा अमीत शाह, नरेंद्र मोदी जी और राजनाथ सिंह जी को आगे करके भाजपा के संस्थापक सदस्य :-लालकृष्ण आडवाणी जी, डाॅ मुरली मनोहर जोशी जी जैसे नेताओं को किनारे लगाकर नरेंद्र मोदी जी को प्रधानमंत्री का उम्मीदवार घोषित कर दिया और देश की जनता नरेंद्र मोदी जी के दिखाये झूठे सपने में मुग्ध होकर देश की सत्ता उनके हाथों में 2014 में सौंप दी। तब से भाजपा की नरेंद्र मोदी जी की सरकार लगातार पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक समाज के 85% बहुजन समाज के हितों और देश के हितों के विरोध में काम कर रही है। पर चुंकी विपक्ष पूरी तरह धाराशाई हो चुका है इसलिए केन्द्र की मोदी सरकार और अन्य राज्यों की भाजपा सरकार लगातार अपनी मनमानी 

करके जन विरोधी, किसान विरोधी, जनता विरोधी और देश विरोधी फैसले लेकर देश प्रदेश को बर्बाद करने पर तूली हुई है। केन्द्र की मोदी सरकार ना तो अपने सहयोगी दलों की बात सुन रही है और ना जनता के द्वारा आवाज उठाये जाने पर उनकी बात पर ध्यान दे रही है। देश के सभी संवैधानिक उपक्रम, एजेंसियों :-सीबीआई, आरबीआई, चुनाव आयोग, योजना आयोग (अब नीति आयोग), सुप्रीम कोर्ट यहाँ तक की पत्रकारिता /अखबार /टीवी न्यूज चैनल्स को भी अपने अतिक्रमण का शिकार बनाकर उन्हें पंगु बना चुकी है। पूर्व की मनमोहन सिंह सरकार द्वारा दिये गये ” सुचना के अधिकार” के भी मोदी सरकार पैर कतर चुकी हैं। केन्द्र की मोदी सरकार बडे़ बैंक डिफोल्टर और अपने करीबियों:-विजय माल्या, नीरव मोदी, मेहुल चौकसी को जैसे सरकारी बैंक के घोटालेबाज -बेईमान -गद्दार को भारत से बाहर विदेश में भगा चुकी है और उन्हें भारत वापस लाने में नाकाम रही है। बिना पूर्व तैयारी के नोटबंदी करके 130 से उपर निर्दोष लोगों की जान लिये जाने का पाप कब चुकाएंगे मोदी जी? बिना पूर्व तैयारी के जीएसटी लागू करके करीब 173 से उपर संशोधन करके उनकी कलई/पोल खुल चुकी है,आखिर देश की जनता के साथ यह मजाक नहीं तो और क्या है!? जो मोदी जी हर वर्ष दो करोड़ नये रोजगार देने की बात की थी वे वह तो पुरा नही किये पर पूर्ववर्ती सरकार के नीति ने जिन्हें रोजगार दिलाये थे वैसे करीब 4 करोड़ से उपर रोजगार,/नौकरियाँ मोदी जी खा चुके हैं। स्विस बैंक से कालाधन वापस लाकर हर व्यक्ति के खाते में 15 लाख कब आएगा यह पता नहीं? पाकिस्तान से एक भारतीय सिर के बदले 10 सिर कब आएंगे यह भी पता नहीं? 100 स्मार्ट सिटी,भाजपा सांसदों द्वारा गोद लिये गये गाँव का कितना विकास हुआ यह भी पता नहीं? नक्सल, आतंकवाद और देश के अंदर विभिन्न लगातार बढ़ते अपराध के आंकड़े बताते हैं कि मोदी सरकार पूरी तरह फेल हो चुकी है।

  बिना तैयारी के देश में लाॅकडाउन करना और लाखों मजदूरों /मध्यम वर्ग के परिवार को स़ड़कों पर भरने के लिए छोड़ देना यह जनता के साथ मजाक नहीं तो और क्या है? सरकार चाहती तो जनवरी 2020 के प्रथम और द्वितीय सप्ताह में चीन से केरल वापस आये विद्यार्थी को कोरोना संक्रमित पाये जाने की जानकारी सामने आने के बाद सभी एअरपोर्ट को सील कर सकती थी या वहाँ कड़ाई से कोरोना जाँच जनवरी 2020 में ही शुरू कर सकती थी।तब भारत में शायद कोरोना के मरीज इतनी बड़ी संख्या में नहीं बढती। पर तब केन्द्र की मोदी सरकार ने कुछ भी नहीं किया। और बिना किसी तैयारी के अचानक करीब 3 महीने बाद पहले 22 मार्ग 2020 को एक दिन के लिए पूर्ण लाॅकडाउन किया फिर 24 मार्च 2020 से क्रमशः 15-15 दिनों के लिए लाॅकडाउन की घोषणाएं मोदी जी टी वी पर आकर करते रहें। इस तरह लगातार 22 मार्च 2020 से 31 मई 2020 तक देश पूर्ण रूप से लाॅकडाउन में रहा।इस पीरियड में मजदूरों और मध्यम वर्ग के लोगों ने जो परेशानियों झेली वह देश दुनियां ने देखी थी। आज भी देश कहने के लिए अनलाॅक है पर कार्यालय और दूकान पर जाने के लिए सभी लोकल ट्रेन, पैसेंजर ट्रेन, बसें बंद ही हैं ।ऐसे में जैसे तैसे ही लोग गुजर बसर कर पा रहे हैं। इस अचानक बिना तैयारी के लाॅकडाउन के कारण लाखों कम्पनियां बंद हो चुकी है, लाखों लोगों के बची खुची नौकरियाँ /रोजगार, व्यवसाय समाप्त हो चुके हैं। केन्द्र की मोदी सरकार ने बाद में देश की जनता को राहत पहुंचाने के लिए विशेषज्ञों पैकेज 20 लाख करोड़ की घोषणा की यह घोषणा भी वैसी ही निकली जैसे नरेंद्र मोदी जी ने बिहार की जनता को संबोधित करते हुए 125 करोड़ रुपये विशेष पैकेज और बिहार को विशेष राज्य का दर्जा देने की घोषणा 2014 के लोकसभा चुनाव के दौरान की थी। जब बाद में नरेन्द्र मोदी जी और अमित शाह से बिहार के उस विशेष पैकेज के बारे में सवाल किये गये तो कहा गया कि "वह तो जुमला था।"  ऐसा है भाजपा नेताओं के कथनी और करनी में फर्क!!?? 
भाजपा के सारे जन विरोधी और देश विरोधी नीतियों, फैसले से देखकर यह कहने में कोई गुरेज नहीं है कि भाजपा सारे काम जनता और देश के विरोध में कर रही है।चुंकी भाजपा पूर्ण बहुमत की सरकार है और विपक्ष बिल्कुल कमजोर है इसका खामियाजा देश की जनता भुगत रही है। पूर्ण बहुमत मिलने से भाजपा अहंकार में आकर बेलगाम हो चुकी है इसीलिए यह न तो अपने सहयोगी दलों की सुन रही है और ना जनता की आवाज सुन रही है। जनता द्वारा उठाये गये आवाज को लगातार बल प्रयोग करके दबा रही है तो कुछ को संगीन धारा लगाकर लम्बे समय के लिए जेल में बंद कर रही है। भाजपा ने यह संदेश देने का काम किया है कि "पूर्ण बहुमत की सरकार बेलगाम हो जाती है।" आने वाले समय में शायद देश की जनता किसी भी एक दल को सरकार बनाने के लिए पूर्ण बहुमत नहीं देना चाहेगी। क्योंकि भाजपा को पूर्ण बहुमत देकर और उसके द्वारा किये जा रहे जन विरोधी और देश विरोधी कार्य देश की जनता बहुत अच्छी तरह देख-समझ रही है। इसीलिए भारत में 1989-90 केन्द्र की सत्ता में आई जनता दल की तरह किसी समाजवादी विचार धारा के दलों को तीसरा विकल्प देने की बहुत आवश्यकता है तभी यह दोनों दल कांग्रेस और भाजपा पर लगाम लग पाएगा वरना दोनों राष्ट्रीय दलों के नेता झूठे सपने दिखाकर हर बार की तरह बारी बारी से गुप्त समझौता करके देश की सत्ता सुख भोगते रहेंगे। देश में मा. एच डी देवेगौडा़, शरद पवार, नीतीश कुमार, शरद यादव,चन्द्र बाबू नायडू, ममता बनर्जी,नवीन पटनायक, मुलायम सिंह यादव, मायावती, रामविलास पासवान,शिरोमणी अकाली दल के नेता, लालू प्रसाद यादव जैसे नेताओं को मिलकर सभी समाजवादी विचार धारा के राजनैतिक दलों को आपस में विलय करके एक दल के नीचे चुनाव लड़ना चाहिए ऐसा अगर किया जाता है तो निश्चित ही सफलता मिलेगी और दोनों राष्ट्रीय दल के मनमानी पर रोक लग पाएगा। इसीलिए देश की जनता उपर लिखित नेताओं पर दबाब बनाकर उन्हें एक राजनैतिक दल में विलय करके एक दल /मंच के नीचे लोकसभा और विधान सभा चुनाव लड़ने के लिए दबाव बनाये क्योंकि भारत में तीसरा विकल्प देने की बहुत आवश्यकता है। तीसरे विकल्प के आने से कांग्रेस और भाजपा दोनों राष्ट्रीय दलों के नाक में नकेल डाला जा सकेगा जो वक्त की मांग है। 

संस्थापक राष्ट्रीय समता महासंघ

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