हिमाचली भाषा व लोक संस्कृति के संरक्षण हेतु प्रतिबद्ध है हिमवाणी संस्था

शि.वा.ब्यूरो, शिमला। हिमवाणी संस्था के सभी सदस्य हिमाचली भाषा, लोक साहित्य व संस्कृति के संरक्षण हेतु प्रतिबद्ध है, अब तक हिमवाणी  फेसबुक पेज पर हिमाचली भाषा के 120 से ज्यादा एपिसोड प्रसारित हो चुके हैं और यह कारंवा आगे भी ज़ारी रहेगा, यह कहना है हिमवाणी शिमला के सचिव संजीव कुमार का।
संजीव कुमार ने बताया कि बहुत से साहित्यकारों ने कविताएं व लेख प्रस्तुत कर  हिमाचल के विभिन्न जिलों की बोलियों को आमजन तक पहुंचाने का प्रशंसनीय कार्य किया है।
उन्होंने कहा कि जिन साहित्यकारों, लेखकों व कवियों ने अपनी उपस्थिति से पटल को गौरवान्वित किया है, उनमें प्रमुख रूप से धर्म पाल भारद्वाज (कोटगढ़, शिमला), ओम प्रकाश शर्मा (शिमला), नवीन हलदूणवी (कांगड़ा) ,देवराज संसालवी (कांगड़ा), अशोक दर्द (चम्बा), रोशन लाल पराशर (बिलासपुर), कृष्णचंद महादेविया (मंडी), प्रत्यूष गुलेरी (कांगड़ा), अनंत आलोक (सिरमौर), वीरेन्द्र शर्मा वीर, हरिप्रिया (मंडी), निर्मला चंदेल (मंडी), श्यामा जैन (सोलन), शीला सिहं (बिलासपुर), सीता राम शर्मा (मंडी), पौमिला ठाकुर (मंडी), कृष्णा ठाकुर (कुल्लू), कल्पना ठाकुर (शिमला), प्रमोद कुमार हर्ष (मंडी), सुनिता ठाकुर (मंडी),बाबू राम आज़ाद (शिमला), रविन्द्र कुमार शर्मा (बिलासपुर), सुरेश कोंडल (कांगड़ा), मुकेश चंद नेगी (किन्नौर), नरेन्द्र कुमार शर्मा (शिमला), वंदना राणा (कांगड़ा), कल्पना गांगटा (शिमला), वीना वर्धन (बिलासपुर), उमा ठाकुर (शिमला) आदि शामिल है।
हिमवाणी शिमला के सचिव ने बताया कि इसके अलावा हिमवाणी द्वारा भाषा विभाग के साथ मिलकर विलुप्त होते विवाह संस्कार गीतों का वीडियो व डोक्यूमेन्टरी के माध्यम से संरक्षण करने का प्रयास किया गया है। उन्होंने कहा कि युवा पीढ़ी व बच्चों को इस कोरोना काल में अवसाद से दूर रखने के लिए बहुत से ऑनलाईन कार्यक्रम, जैसे- वेष, नृत्य प्रतियोगिता, पेंटिग, पर्यावरण,सवच्छता व कोविड-19 से बचाव के लिए जागरूकता के लिए  सैल्फी विद मास्क आदि अभियान आयोजित किए गए हैं। उन्होंने बताया कि ग्रामीण महिलाओं द्वारा बड़े पैमाने में हिमवाणी की उपसचिव ज्ञानी शर्मा के नेतृत्व में मास्क बनाए गए, इतना ही नहीं, उन्हें गाँव-गाँव जाकर बजुर्गों व बच्चों को वितरित भी किया गया है। संजीव कुमार ने बताया कि लोकल फोर वोकल को बढ़ावा देते हुए हाथ से सुन्दर-सुन्दर राखियां बनाई गई। इसके साथ ही हिमाचली भाषा व लोक नृत्य के माध्यम से भी बच्चों ने पटल पर अपनी दमदार प्रस्तुति दर्ज कराई है।
उन्होंने कहा कि हिमाचली भाषा व लोक संस्कृति के संरक्षण के अभियान में बच्चों  को साथ लेकर चलना बहुत जरूरी है, ताकि वह भी अपनी अमूल्य लोक संस्कृति व हिमाचली भाषा के महत्व को समझ सके।
हिमवाणी संस्था के सचिव व संस्थापक संजीव कुमार व कोषाध्यक्ष कल्पना गांगटा ने हिमाचली भाषा के संरक्षण और संवर्धन हेतु अमूल्य योगदान के लिए सभी लेखकों को भविष्य में हिमवाणी के किसी आयोजन में “हिमाचली भाषा संवर्धक” प्रशस्ति पत्र प्रदान करने की घोषणा की है। उन्होनें बताया कि फेसबुक पेज के अलावा हिमवाणी टीम अन्य सोशल मीडिया, यूटयूब चैनल और वेबसाइट https://himvanishimla.wordpress.com के माध्यम से भी हिमाचली भाषा, लोक साहित्य व संस्कृति को विश्व पटल पर पहुंचाने का काम बखूबी कर रहे हैं। इसके अलावा हिमवाणी के सदस्य अनुराधा शर्मा, कुलदीप शर्मा, दीपक शर्मा, जतेन्द्र सहोत्रा, रीना शर्मा, रमेश शर्मा और उमा नधैक हिमाचली भाषा व लोक संस्कृति के सरंक्षण के लिए ग्रामीण व शहरी स्तर पर बखूबी कार्य कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि यह प्रयास इसलिए भी जरूरी है, क्योंकि युवापीढ़ी कहीं न कहीं पहाड़ी बोली से विमुख होती जा रही है। उनका मानना है कि यह हम सभी की नैतिक जिम्मेदारी है कि हम सब मिलकर इन बोलियों का संरक्षण और संवर्धन करें, ताकि हिमाचली भाषा गाँव की मुंडेर से विश्व पटल पर अपना परचम लहराए और सविंधान की आठवीं अनुसूची में जल्द ही शामिल हो।

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