…तो ये है अक्षय तृतीया का रहस्य

लक्ष्मी प्रसाद मैंदुली, शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र।

आज भी लोगों के मन में अक्षय तृतीया के बारे मेें जानने की उत्सुकता है कि आखिर अक्षय तृतीया का इतना महत्व क्या है और क्यों है? तो आईए! जानते है अक्षय तृतीया के बारे में कुछ महत्वपूर्ण बातें।
बताते हैं कि आज ही के दिन अक्षय तृतीया को ब्रह्माजी के पुत्र अक्षय कुमार का अवतरण हुआ था। आज ही माँ अन्नपूर्णा का भी अवतरण हुआ था। चिरंजीवी महर्षि परशुराम का जन्म भी इसी दिन हुआ था, इसीलिए इसी दिन परशुराम जन्मोत्सव भी मनाया जाता है। बताते हैं कि आज ही के दिन कुबेर को खजाना प्राप्त हुआ था और आज ही माँ गंगा का धरती पर अवतरण हुआ था। आज ही सूर्य भगवान ने पांडवों को अक्षय पात्र दिया था और आज ही के दिन महाभारत का युद्ध समाप्त हुआ था।
आज ही के दिन से वेदव्यास ने महाकाव्य महाभारत की रचना गणेश जी के साथ शुरू की थी। आज ही के दिन प्रथम तीर्थंकर आदिनाथ ऋषभदेवजी भगवान के 13 महीने का कठिन उपवास का पारणा इक्षु (गन्ने) के रस से किया गया था।
ज्ञात हो कि आज ही के दिन प्रख्यात् तीर्थ श्री बद्री नारायण धाम के कपाट खोले जाते हैं। आज ही बृंदावन के बाँके बिहारी मंदिर में श्री कृष्ण चरण के दर्शन होते है। आज ही जगन्नाथ भगवान के सभी रथों को बनाना प्रारम्भ किया जाता है और आज ही के दिन आदि शंकराचार्य ने कनकधारा स्तोत्र की रचना की थी।
जानकारों की मानें तो अक्षय का मतलब होता है कि जिसका कभी क्षय (नाश) न हो। विद्वानों के अनुसार अक्षय तृतीया अपने आप में स्वयं सिद्ध मुहूर्त है। आज के दिन कोई भी शुभ कार्य का प्रारम्भ किया जा सकता है।

खतौली ( मुज़फ्फरनगर) उत्तर प्रदेश

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