साहित्यकारों, कलाकारों, बुद्धिजीवियों का मंच साहित्य कला संवाद


हितेंद्र शर्मा, शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र।

हिमाचल कला संस्कृति भाषा अकादमी का मुख्य उद्देश्य प्रदेश की पारंपरिक और समकालीन कला, संस्कृति, भाषा, साहित्य का संरक्षण,  प्रलेखन, प्रकाशन और प्रचार प्रसार हैं। हिमाचल प्रदेश की पारंपरिक लोक संस्कृति, मेले, पर्व, त्यौहार की डॉक्यूमेंट्री तैयार की जा रही हैं। यह अकादमी के फेसबुक पेज और यूट्यूब चैनल पर उपलब्ध हैं। अकादमी द्वारा पहाड़ी चित्रकला, शिमला अतीत एवं वर्तमान, कुल्लू दशहरा  और मंडी शिवरात्रि आदि  फिल्मों का निर्माण भी किया गया है। इसके अलावा प्रदेश के सम्मानित एवं वरिष्ठ साहित्यकारों तथा कलाकारों के जीवन वृत्त और उनके महत्वपूर्ण योगदान के आधार पर डॉक्यूमेंट्री भी तैयार की गई है। अकादमी की स्थापना के 50 वर्ष पूर्ण होने को है । इस उपलक्ष्य में कला, साहित्य, भाषा एवं संस्कृति के क्षेत्र में विभिन्न योजनाओं के माध्यम से कार्य करने का संकल्प है।
हिमाचल कला संस्कृति भाषा अकादमी वर्तमान में फेसबुक लाइव के माध्यम से हर रोज शाम सात बजे साहित्य कला संवाद कार्यक्रम का प्रसारण कर रही है। यह कार्यक्रम साहित्य कला भाषा संस्कृति और सामयिक चिंतन आदि विषयों में परिचर्चा के लिए समर्पित है। इस कार्यक्रम के माध्यम से प्रदेश और देश के विभिन्न भागों से आमंत्रित साहित्यकार, कलाकार, बुद्धिजीवी, पत्रकार, समाजसेवी विद्वान अपने विचार साझा करते हुए अपनी रचनाओं का पाठ कर चुके है। साहित्य कला संवाद कार्यक्रम के माध्यम से अब तक एक सौ तीस से अधिक सफल कार्यक्रम आयोजित किए जा चुके हैं जिनमें कलाकारो, साहित्यकारों, पत्रकारों तथा बुद्धिजीवियों द्वारा विभिन्न विषयों पर अपने विचार व्यक्त किए गए, व्याख्यान प्रस्तुत किए और अपनी रचनाओं का भी पाठ किया गया। 
इस कार्यक्रम के माध्यम से पुरस्कृत, वरिष्ठ, सम्मानित, नवोदित तथा बाल लेखकों, कलाकारों और रंगकर्मियों को उनके विचारों को व्यक्त करने तथा रचना पाठ करने के लिए अवसर प्रदान किया गया है। इस कार्यक्रम के माध्यम से अनेक ज्वलंत विषयों पर भी परिचर्चा आयोजित की जाती है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति, सांस्कृतिक नीति, संस्कृत नीति आदि विषयों पर व्यापक परिचर्चा के माध्यम से सफल कार्यक्रम आयोजित हुए हैं। इन सभी कार्यक्रमों की वीडियो अकादमी के फेसबुक पेज पर तथा यूट्यूब चैनल पर भी उपलब्ध हैं जो कि अकादमी का एक महत्वपूर्ण डाटा बैंक बन गया है और जिसका हजारों दर्शक, श्रोता और जिज्ञासु लाभ उठा रहे हैं।
साहित्य संवाद कार्यक्रम में हिमाचल प्रदेश के भूतपूर्व मुख्यमंत्री, भारत सरकार के पूर्व मंत्री एवं वरिष्ठ साहित्यकार श्री शांता कुमार द्वारा विभिन्न विषयों पर अपने विचार व्यक्त किए गए। केंद्रीय विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. कुलदीप चंद अग्निहोत्री का भारत के उत्तरी सीमावर्ती क्षेत्रों में चुनौतियां तथा उनका समाधान विषय पर वक्तव्य काफी चर्चित रहा और इसके माध्यम से लोगों को चीन तिब्बत सीमाओं पर होने वाली गतिविधियों और भारतीय दृष्टिकोण पर भी  उपयोगी जानकारी प्राप्त हुई। साहित्य संवाद में आचार्य एडीएन बाजपेयी, प्रोफेसर रोशन लाल शर्मा, डॉ. ओमप्रकाश सारस्वत,  सुदर्शन वशिष्ठ,  जगदीश शर्मा,  नवनीत शर्मा, जाहिद अबरोल, रेखा वशिष्ठ, विनोद भावुक, द्विजेन्द्र द्विज, रेखा डडवाल आदि साहित्यकार अपनी रचनाओं का पाठ कर चुके हैं।
कलाकारों में जम्मू से सरस भारती, रूही जूही और हिमाचल प्रदेश से दीपक गौतम, पीयूष राज, करनैल राणा, लता शर्मा, सुमन सोनी, दीक्षिता चौहान, चंपा शर्मा, संतोष आदि कलाकार अपनी प्रस्तुतियां दे चुके हैं। संगीत की प्रस्तुतियों में सीमा आरजू का ग़ज़ल गायन और हरिदत्त भारद्वाज का बांसुरी वादन लोगों द्वारा बहुत पसंद किया गया।
इस कार्यक्रम को प्रदेश, देश और विदेश से संस्कृति एवं साहित्य में रूचि रखने वाले दर्शकों का अभूतपूर्व सहयोग और आशीर्वाद प्राप्त हो रहा है। वर्तमान कोरोना काल में नियमित रूप से प्रसारित होने वाला हिमाचल अकादमी का “साहित्य कला संवाद” एक सर्वाधिक लोकप्रिय कार्यक्रम है। माननीय शिक्षा, भाषा संस्कृति मंत्री श्री गोविन्द सिंह ठाकुर जी ने हिमाचल कला संस्कृति भाषा अकादमी के इस मंच से राष्ट्रीय शिक्षा नीति पर अपने बहुमूल्य विचार रखें और अकादमी के कार्यक्रमों की सराहना कर अकादमी परिवार को आशीष प्रदान किया हैं। 

संयोजक साहित्य कला संवाद कार्यक्रम कुमारसैन, शिमला, हिमाचल प्रदेश

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