आईए! एक कदम समाज के हित में…..

हवलेश कुमार पटेल, शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र।

राजनीतिक विचारधारा व्यक्तिगत बात है। विचारधारा अलग होने के बावजूद हमें जातिगत हित से जुड़े रहना है। आओ! इसके लिए एक कदम आगे बढ़ायें। जो जहां है, जिस भी स्थिति में या जिस भी लायक है, इस कार्य में अपना सहयोग दे सकता है। कुछ लोग समय नहीं दे सकते, लेकिन धन दे सकते हैं, परन्तु असल बात यह है कि दें किसे और क्यों? कुछ लोग अपना समय दे सकते हैं, लेकिन फिर वही सवाल दे किसे और क्यों? कुछ लोग न समय दे सकने की स्थिति में है और न ही धन दे सकने की स्थिति में हैं, लेकिन अपना दिल और दिमाग दे सकते हैं। इसके बावजूद वे जिस जाति में जन्में हैं उसके हितार्थ अपना दिल और दिमाग देने में संकोच कर रहे हैं, यह गलत है, उन्हें आगे आना चाहिए, क्योंकि वे ही समाज को दिशा दे सकते हैं और आज समाज में बढ़ रहे बिखराव को रोकने के लिए कोई रास्ता सुझा सकते हैं।
बता दें कि आज अखिल भारतीय कुर्मि क्षत्रिय महासभा कई गुटों में बंटी हुई है और इस स्थिति को देख लोग अफसोस तो व्यक्त करते हैं, लेकिन स्थिति को सम्भालने के लिए कोई आगे नहीं आ रहा है, जिससे अलगाववादी लोगों को हौंसले बुलन्द हैं और कुछ लोग अंधों में काना सरदार बने बैठे हैं। तो इंतजार किस बात का, आईये! अखिल भारतीय कूर्मि क्षत्रिय महासभा के एकीकरण के लिए लोग कदम उठाएं, आगे बढ़ें और कम से कम अपने सुझाव तो दें। हम अपने-अपने अहम को किनारे रखकर समाज की एकता के बारे में बात करें तो धीरे-धीरे स्थिति सामान्य हो जाएगी।


हमें हमारे समाज सुधारक पूर्वजों के जीवन से सबक लेते हुए समाज सुधार की बात करनी चाहिए। शिक्षा व व्यवसाय की बात करनी चाहिए। विवाह सम्बन्धों में विस्तृत सोच की बात करनी चाहिए, क्योंकि यही दहेज व पर्दाप्रथा खत्म करने की सही शुरूआत हो सकती है। हमें लड़कियों की शिक्षा व उनकी समानता की बात करनी होगी। देखने में आ रहा है समाज के नाम पर बहुत से व्हाट्स एप गु्रप हैं, लेकिन उनमें समाज सुधार की बातें कम और राजनीतिक व अन्य व्यर्थ की बातें अधिक की जा रही हैं।
ग्लोबल युग में जीने का दम्भ भरने वाले हम और हमारे युवा जातिगत पहचान से अंजान हैं। हमें आज भी अलग-अलग प्रदेशों में निवास कर रहे कुर्मियों के सरनेम नहीं मालूम? हमें इस ओर भी प्रयास करना होगा। आज हम समाजहित के रचनात्मक कार्य तो कर नहीं पा रहे, लेकिन पदों के लिए लड़ते-लड़ते अलग-अलग गुटों में बंटते जा रहे हैं, यहां तक कि अखिल भारतीय कुर्मि क्षत्रिय महासभा को तीन-तीन गुटों में विभाजित कर दिया है। इसके लिए समाज शायद ही माफ कर पाये।


जानकारों के अनुसार स्थिति इतनी खराब भी नहीं है कि सम्भाली न जा सके, लेकिन इसके लिए दिल और दिमाग वाले लोगों को आगे आना होगा। यकीन मानिए, जिस दिन मात्र दर्जन भर दिल-दिमाग वाले लोग इस काम के लिए आगे आ गये, उसी दिन से समाज को नई दिशा प्राप्त होना आरम्भ हो जायेगा। सर्वविदित है कि सरदार पटेल एक ही थे, जिन्होंने कुर्मी समाज को बुलन्दियों तक पहुंचा दिया था। शाहू जी महाराज एक ही थे, जिन्हें महान समाज सुधारक के रूप में आज भी याद किया जाता है, लेकिन हम ही उनकी महान विरासत को सम्भालने में विफल हो रहे हैं। तो आईए! समाज के गौरवशाली इतिहास को टटोले, पुराने सारे दस्तावेज एक जगह एकत्र करें। नई पीढ़ी को कुर्मियों के गौरवशाली इतिहास उपलब्ध करायें, ताकि हम और आने वाली पीढ़ी खुद और अपने पूर्वजों पर गर्व कर सके और उनमें कभी हीनता पनप ही न सके। तो आईए! एक कदम समाज सुधार की ओर………

खतौली मुज़फ्फरनगर उत्तर प्रदेश

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