अच्छे दिन आयेंगें

अ कीर्ति वर्द्धन, शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र।

कामना अस्पताल की क्यों,
चाह तुम्हें शमशान की,
क्यों नहीं करते हो बातें,
तुम मानवता के उत्थान की।
अच्छे दिन ही तो हैं जब
संकट से लड़कर निकल रहे,
विश्व भयाक्रांत, भारत में
घड़ी कोरोना के अवसान की।
देश में जब देखते हैं,
व्यथित कांगी वामी आपियों को,
कालाबाजारीयों के समर्थक,
भ्रष्ट चमचों के निपटान की।
सबको कहा था घर में बैठो,
सामाजिक दूरी मास्क पहनो,
अच्छे दिन उनके ही आये,
यह बात है राष्ट्र के सम्मान की।
मुज़फ्फरनगर, उत्तर प्रदेश

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