चित भी अपनी पट भी अपनी

त्रयंबकेश्वर त्रिवेदी “सुनीलजी”, शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र।

चित भी अपनी पट भी अपनी ,
टइयां अपने बाप का ।
बाकी सबकी ऐसी तैसी ,
जलवा जनाब आपका ।।
चित भी अपनी …
जिससे पैदा पले बढ़े तुम ,
जिसने तुमको बड़ा बनाया ।
कितनी पीड़ाएं सह करके ,
मन में था अरमान सजाया ।।
मातु पिता दादा दादी को ,
देता तू है आप क्या ।।
चित भी अपनी …
जिस धरती पर पले बढ़े तुम ,
उसका कर्ज चुकाना होगा ।
पत्नी बच्चे की उन्नति हित ,
संस्कारिता निभाना होगा ।।
बड़ों की अच्छाइयां वरन् कर ,
कहना छोड़ हिसाब ला ।।
चित भी अपनी …
मातु पिता जैसे तेरे हैं ,
वैसे सबके होते हैं ।
बेटी बेटे सब केरे हैं ,
तेरे जैसे होते हैं ।।
अंतर ढूंढे क्यों इन सबमें ,
अपने में बदलाव ला ।।
चित भी अपनी …
पत्रकार, गीतकार व लोक रंगकर्मी लखनऊ, उत्तर प्रदेश

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