नहीं रहे मूर्तिकार, आर्किटेक्ट व पद्म विभूषित सांसद रघुनाथ महापात्र, अधूरा रह गया ओडिशा में दूसरा कोणार्क बनाने का सपना

कार्तिक कुमार परिच्छा, सरायकेला (झारखंड )। प्रख्यात मूर्तिकार, आर्किटेक्ट व पद्म विभूषित सांसद रघुनाथ महापात्र का गुजर जाना ओडिया जाति के लिए अपूरणीय क्षति है। उनके निधन पर राष्ट्रपति एवं प्रधानमंत्री ने शोक जताया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रघुनाथ महापात्र के परिजनों से की बात करके शोक संवेदना व्यक्त की और उन्हें इस दुःख की घडी में हर संभव मदद का आश्वासन दिया। मुख्यमंत्री नवीन पटनायक खुद ओडिशा में राजकीय सम्मान के साथ अन्तिम संस्कार करायेगें।

रघुनाथ महापात्र 22 अप्रैल को कोविड का लक्षण दिखाई देने के बाद एम्स में भर्ती हुए थे, तभी से उनका इलाज एम्स में चल रहा था। इलाज के दौरान स्वास्थ्य सुधार आने के बदले उनकी हालत लगातार ख़राब होती गई और 78 साल की आयु में पद्मविभूषण रघुनाथ महापात्र ने कोरना से जंग कल हार गए। अपराह्न तीन बजकर 49 मिनट पर 78 साल की उम्र में उनका निधन होने की जानकारी भुवनेश्वर एम्स की तरफ से कल रविवार दी गई। उनके निधन पर राष्ट्रपति, प्रधानमत्री मोदी, ओडिशा राज्यपाल प्रो. गणेशी लाल, मुख्यमंत्री नवीन पटनायक, केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान व अन्य कई वरिष्ठ नेताओं ने शोक प्रकट किया है। कुछ दिन पहले ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनके स्वास्थ्य की जानकारी लेने के साथ ही उनके परिवार के साथ टेलीफोन के जरिए चर्चा की थी।
मुख्यमंत्री पटनायक ने कहा कि ओडिशा की मुर्ती कला एवं वास्तु कला का अवदान को सदैव याद रखा जाएगा। वास्तुकला एवं पत्थर पर खुदाई कर एक सुप्रसिद्ध शिल्पी के तौर पर रघुनाथ महापात्र ने ओडिशा के साथ देश व दुनिया में अपनी ख्याति स्थापित की थी। उनके कृतित्व ही उनके परिचायक थे। महज आठवीं जमात पास होने के बावजूद अपनी उच्च आकांक्षा के बल पर राज्य की ख्याति को उन्होंने पूरी दुनिया में पहुंचाने का काम किया था।
पुरी जिले के सदर ब्लाक खपुरिया गांव में 24 मार्च, 1943 को रघुनाथ महापात्र का जन्म हुआ था। रघुनाथ महापात्र ने युवा काल में ही अपनी प्रतिभा का लोहा मनावा दिया था। राज्य में अनेक आकर्षणीय कला कृति उनके हाथों से आज जीवंत हो बात करते हैं । उनके इसी कृति के लिए 1975 में केंद्र सरकार ने उन्हें पद्मश्री सम्मान से सम्मानित किया था। इसके बाद सन् 2001 में उन्हें पद्म भूषण तथा 2013 में पद्म विभुषण सम्मान से नवाजा था। 2016 में ओडिशा सरकार ने उन्हें ललित कला एकेडमी का अध्यक्ष बनाया था। उन्हें राज्यसभा सांसद भी मनोनीत किया गया था।

आर्किटेक्चर तथा राज्यसभा सदस्य पद्मविभूषण रघुनाथ महापात्र का अंतिम संस्कार राजकीय सम्मान के साथ संपन्न किया जाएगा। मुख्यमंत्री नवीन पटनायक उनके निधन पर शोक प्रकट करते हुए यह घोषणा की है। मुख्यमंत्री ने कहा है कि ओडिशा की कला एवं इतिहास को समृद्ध करने में उनके महान अवदान सदैव स्मरणीय रहेंगे। वे महाप्रभु श्री जगन्नाथ जी के अनन्य भक्त थे । केवल ओडिशा ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया में अपनी कलाकृति के जरिए प्रदेश एवं देश का नाम उन्होंने रोशन किया है। मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने बताया कि भारतीय संसद के सेंट्रल हॉल में 6 फीट की भगवान सूरज की प्रतिमा 1974 में उनके जरिए महज 20दिन में बनाई गई थी। तब उन्होंने कहा था यह संसद में ओड़िया जाति की स्मृति चिन्ह होगा। प्रधानमंत्री मोदी के कार्यालय में धोलपुरी संगमरमर का दीपक उनके द्वारा बनाया गया है। राजीव गांधी के समाधि स्थल वीरभूमि में 30 फुट लंबा 38 फुट चौड़ा काले पत्थर का कमल फूल उनके द्वारा ही बनाया गया था। इलाहाबाद एवं दिल्ली में स्वामीनारायण मंदिर इनके 500 छात्रों द्वारा बनाया गया था । नवीन पटनायक ने बताया कि रघुनाथ महापात्र ने भारत में कुल 14 मंदिरों में अपनी कलाकृति का प्रदर्शन किया है। उन्होंने कुछ पुराने मंदिरों को नया रूप देने के लिए भी महत्वपूर्ण काम किया है। उन्होंने आज से एक दशक पूर्व सरायकेला आकर जगन्नाथ मंदिर सरायकेला का भी निरीक्षण किया था। पुरी जगन्नाथ मंदिर के मरम्मत कार्य में भी उन्होंने सहयोग किया था। मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने बताया कि वास्तव में रघुनाथ महापात्र कला जगत के विस्मयकारी प्रतिभा पुरूष थे।

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