जिला आपूर्ति पदाधिकारी राम कृष्ण कुमार का भारतीय खाद्य निगम के गोदामों पर छापा, आखिर कौन दे रहा था कालाबाजारियों को संरक्षण

कार्तिक कुमार परिच्छा, सरायकेला (झारखंड)। अनुमंडल पदाधिकारी सह जिला आपूर्ति पदाधिकारी राम कृष्ण कुमार ने सरायकेला एवं गम्हरिया स्थित भारतीय खाद्य निगम के गोदामों का औचक निरीक्षण किया। उन्होंने वहां रखे अनाज आपूर्ति एवं निर्गमन रजिस्टर का भी मिलान करते हुए राशन कार्ड धारियों को किसी भी हालत में अनाज कम नहीं देने, अन्यथा मामला दर्ज किये जाने का आदेश उपस्थित राशन दुकानदारों को दिए।
बता दें कि दशकों से कालाबाजारी का पर्याय बना सरायकेला का गोदाम समय-समय पर सुर्खियों में रहा है। ऐसे में कोरोना काल का संकट को देखते हुए सरायकेला के तेजतर्रार अनुमंडल पदाधिकारी सह जिला आपूर्ति पदाधिकारी रामकृष्ण कुमार ने दो गोदामों का औचक निरीक्षण किया। गोदाम के अंदर रखे अनाज के साथ-साथ अनाजों की आगमन एवं बहिर्गमन बही की भी जांच-पड़ताल की। उन्होंने बताया कि सब कुछ सही पाया है। अनुमंडल अधिकारी रामकृष्ण कुमार की इस कार्रवाई की लोगों ने काफी प्रशंसा की है। नीचे तबके के आदिवासी एवं मूलवासियों में हेमंत सरकार के प्रति एक उम्मीद की किरण जगी है।
जानकारों की माने तो विगत कोरोना काल में पूर्व जिलाधिकारी ऐ दड्डे ने यहां एक ऐसे अनाज से लदे ट्रक को पकड़ा था, जो किसी और जगह का था और माल उतारने हेतु हेतु यहां पहुंच गया था। जिलाधिकारी ऐ दड्डे ने उसे बिना किसी कार्रवाई के ही उसे छोड़ दिया था, इससे कालाबाजारियों के हौंसले बुलंद हो रहे थे और रोजबरोज इसी प्रकार अनेक गाड़ियों से अनाज की बोरियां अवैध रूप से उतारी जा रही थी।
बता दें कि जिले का खरसावां, कुचाई प्रखंड से लेकर सरायकेला के उड़िया भाषी बहुल शहरी एवं ग्रामीण इलाके के लोग कुपोषण से युक्त जिंदगी जीने पर मज़बूर हैं। आंकड़ों के अनुसार कुपोषण की रैंकिंग में पश्चिम सिंहभूम भारत में सबसे ऊपर है। सरायकेला खरसावां जिला भी इससे अछुता नहीं है। स्थानीय लोगों का एक सवाल महत्वपूर्ण है कि देश में अगर फूड सिक्योरिटी एक्ट है तो कुपोषण का ग्राफ को ऊपर ले जाने वालों पर कठोर कार्रवाई होनी चाहिए या नहीं? उनके ज़हन में लगातार ये सवाल दस्तक देता है कि तत्कालीन ब्लैक मार्केटरों को आखिर कौन संरक्षण दे रहा था ?

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