ओडिशा के पत्रकार बने फ्रंटलाइन कोविड वारियर, झारखंड सरकार मौन ?

कार्तिक कुमार परिच्छा, सरायकेला (झारखंड )। अतीत में कभी उड़ीसा का एक जिला रहा झारखंड स्थित सरायकेला खरसावां मे भी झारखंड के पत्रकारों को मुख्यमंत्री नवीन पटनायक के तर्ज पर कोरोना योद्धा घोषित करने की मांग उठ रही है। आज उड़ीसा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने जहां पत्रकारों को कोरोना योद्धा कह कर लाभ देने की बात कही है, वहीं झारखंड मे इस दिशा में सरकारी स्तर पर कोई प्रयास नहीं हुआ हैै। न ही कोई लाभ मिला है। नतीजतन झारखंडी पत्रकार मायूस है। अनेक जगह आन्दोलन भी हो रहे है ।
कोरोना विषाणु का प्रभाव लगातार बढ़ते मामलों के बीच ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने पत्रकारों को राज्य के फ्रंटलाइन कोविड वॉरियर घोषित किया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस समय पत्रकार बेहद शानदार काम कर रहे हैं। लगातार लोगों तक खबर पहुंचा रहे हैं, कोविड 19 से जुड़े मुद्दों पर जागरुकता फैला रहे हैं। इस गंभीर स्थिति में भी पत्रकारों के काम के प्रति जज्बे को देखते हुए उन्हें भी सीएम नवीन पटनायक ने फ्रंटलाइन कोविड वॉरियर घोषित किया है। वहीं दूसरी ओर ओडिशा में 14 दिनों के लॉकडाउन की घोषणा की गई है। ये लॉकडाउन 5 मई से शुरू होकर 19 मई तक रहेगा, हालांकि जरूरी सेवाओं को इस लॉकडाउन से छूट दी गई है। इसके अलावा टीकाकरण की प्रक्रिया पर भी लॉकडाउन का कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।
झारखंड में पत्रकारों को फ्रंटलाइन कोविड वारियर्स आज तक घोषित नहीं किया गया है। इतना ही नहीं सरायकला खरसावां जिले में गत वर्ष तत्कालीन जिलाधिकारी ऐ दडे ने जिले के एक पत्रकार बसंत साहू पर महामारी अधिनियम के तहत केस बनाकर जेल में डाल दिया था। उनका दोष बस इतना ही था कि उन्होंने उपायुक्त द्वारा कोरोना ग्रसित एक समाचार पर हुए वार्तालाप को सार्वजनिक कर दिया था। उपायुक्त ए दडे उन्हें परेशान न होकर सो जाने की सलाह दे रहे थे। आज देश का सर्वोच्च न्यायालय ने भी पुलिस को कोरना काल में इलाज, आक्सीजन, बेड की मांग कर रहे लोगों पर महामारी अधिनियम के तहत मामला दर्ज नहीं करने का सख्त आदेश आदेश दिया है।

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