वोट हमारा राज तुम्हारा कैसे, क्यों और किसलिए

कूर्मि कौशल किशोर आर्य, शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र।

महाराष्ट्र समेत देश के सभी राज्यों के लोगों की हालत खराब है। देश में मंदिर व नये संसद भवन तो बनाये जा रहे हैं, परन्तु अस्पताल, विद्यालय और महाविद्यालय नहीं बन रहे हैं। देश में विभिन्न राज्यों में चुनाव, उपचुनाव तो कराये जा रहे हैं, लेकिन कोरोना से लोगों की जान बचाने के कोई सार्थक प्रयास नजर नहीं आ रहे हैं। बिना सावधानी और सुरक्षा के चुनाव कराये जा रहे हैं, कोरोना के रौद्र रूप धारण करने और फैलने में यह गैर जिम्मेदारी रवैया ही मूल कारण है। लोग बिना इलाज, बिना दवाई, बिना आक्सीजन के जान गंवा रहे हैं। शमशान में शव जलाने के लिए भी लकड़ियाँ कम पड़ रही हैं। शमशान में शवों का अन्तिम संस्कार करने वालों की लम्बी कतारे और कूपन लेकर भी सुबह से शाम तक इंतजार कर रहे हैं। प्राइवेट अस्पतालों में आम जनता से पैसे लूटे जा रहे हैं और मरीज ठीक होने के बजाय शव के रूप में बाहर आ रहे हैं। इसकी चिंता किसी को नहीं है। सरकारी उपक्रम और सम्पतियों को बेचकर भी रोजगार छीना जा रहा है। महंगाई सुरसा की भांति मुंह बाय खडी है। पेट्रोल 52 रुपये से बढ़कर 90 रुपये प्रति लीटर और रसोई गैस 350 रुपये से बढ़कर 850-900 रूपये हो चुकी हैं। नैतिकता को ताक पर रखकर विधायकों, सांसदों और नगरसेवकों की जमकर खरीद-फरोख्त हो रही है। देश का हर नागरिक हैरान और परेशान है, परन्तु सरकार ताल ठोक रही है कि देश बदल रहा है, आगे बढ़ रहा है।
पता नहीं बहुजन समाज कब और कैसे जागेगा? कब इस गम्भीरता को समझेंगा? देश के 90 प्रतिशत पिछड़ा और दलित बहुसंख्यक मूलनिवासी असंगठित रहकर जब तक आपस में लड़ता रहेगा, तब तक मुट्ठी भर लोग सरकार में बैठकर मनमानी करते रहेंगे। आखिर बहुसंख्यक मूलनिवासी कब समझेगा? वोट हमारा राज तुम्हारा कैसे, क्यों और किसलिए? बहुसंख्यक मूलनिवासी को चाहिए कि वह ईमानदार और कर्तव्यनिष्ठ क्रांतिकारी साथियों को नेता बनाने की कोशिश करे।
संस्थापक राष्ट्रीय समता महासंघ मुंबई, महाराष्ट्र

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