श्रीमद् भागवत चालीसा

डॉ. दशरथ मसानिया, शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र।

सप्तदिवस भगवत कथा, सुनिये ध्यान लगाय।
परीछित राजा ने सुनि,अंत मोक्ष को पाय।।

श्रीमद भगवत कथा विशेषा।
करे श्रवण जन जीवन लेखा।।1
मुकुट मणी ग्रंथन कहलाई।
जयजयजयति भागवत माई।।2
वेद व्यास नारद ने गाई।
शुकदेव परीक्षित सुनाई।।3
भक्ति ज्ञान वैराग्य कहानी।
अंतिम मोक्ष कथा बखानी।।4
वेद व्यास संस्कृत मे भाखा।
छठी सदी में कविता लेखा।।5
इस्कंद बारह आन बनाये।
सहस अठारह श्लोका गाये।।6
जीव सनातन श्रीधर स्वामी।
एकनाथ वल्लभ से आनी।।7
सुदेवाचार्य सुदर्शन सूरि।
विजयध्वज टीका लेखी भूरि।।8
प्रथम इस्कंद अवतार विचारी।
गोकर्णा अरु धुंधाकारी।।9
महभारत के बाद कहानी।
शाप परीक्षित कथा बखानी।।10
दूजा कही विराट स्वरूपा।
स्थूल सूक्षम भगवन रूपा।।11
फिर वरणी सृष्टि विस्तारा।
वराह कथा जयविजया शापा।12
चौथे शिवि पृथु राजा बेना।
ध्रुव की कथा पुरंजय सेना।।13
पृथ्वी दोहन कथा प्रचेता।
स्वयं मनु की सुता विशेषा।।14
पंचम ऋषभ चरित्र बखाना।
गंगा राहू भरत भुवाना।।15
भूखे प्यासों करते दाना।
रन्तिदेव का त्याग बखाना।।16
अब छठवे की सुनो कहानी।
दक्ष प्रजापति वंश बखानी।।17
दुष्ट अजामिल नाम अधारा।
नाम नरायण उनको तारा।।18
वृत्तासुर करि अत्याचारा।
दधिची की अस्थिन से मारा।।19
दिति अदिति विस्तार कहाई।
अदिती पूता देव सहाई।।20
कश्यप पत्नी दिति कहलाई।।
दैत्यों की माता थी भाई।।21
चित्रकेतु वैराग्य बताया।
विश्व रूप भगवान दिखाया।।22
सातम नरसिंह का अवतारा।
हिरण्यकशिपू प्रभु ने मारा।।23
भगत प्रहलाद रक्षा कीनी।
दया भाव से आशिष दीनी।।24
नारी राजा धरम कहानी।
गृहस्थों का मोक्ष बखानी।।25
आठम देवा सुर संग्रामा।
मनवंतर का देते ज्ञाना।।26
राजा बलि बावनअवतारा।
तीन पैर से कर विस्तारा।।27
भस्मासुर का भय संसारा।
रूप मोहिनी दानव मारा।।28
सागर मंथन कथा सुनाई।
चौदह रत्नों धरती आई।।29
अमृत देव शंकर विष खाया।
सुरा असुर श्री विष्णु पाया।30
नवम सूर्य मनु वंश कहानी।
रामायण भी संक्षेप बखानी।।31
तारे संता मारा रावण।
भागीरथ तप गंगा पावन।।32
तीन अंश विष्णु अवतारा।
क्षत्रिय गर्भन को संहारा।।33
दशम इस्कंद महिमा भारी।
सोलह कला कृष्ण अवतारी।।34
चौसठ कला भगत हितकारी।
जन्में मथुरा भर किलकारी।।35
वसू देवकी गर्भन आये।
दुष्ट कंस को मार गिराये।।36
नटखट बालक नंद जसोदा।
चारत गैया ग्वालन मोदा।।37
उपाख्यान अवधूता योगा।
सांख्य किरिया आश्रम भोगा।।38
द्वादश कलियुग कथा अपारा।
धरम अंश भी लिखा विचारा।।39
सार सार सब किया बखाना।
कलियुग सुमरे प्रभु भगवाना 40

श्रीमद भगवत की कथा,पंचम वेद कहाय।
श्रद्धा भक्ती ज्ञान से,सबको करे सहाय।।

23, गवलीपुरा आगर, (मालवा) मध्यप्रदेश

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