पवनपुत्र चालीसा (हनुमान जयंती पर विशेष)

 

डॉ. दशरथ मसानिया, शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र।

 

प्रात: उठ सुमिरण करो, पुण्य नाम हनुमान।
राम लखन के लाड़ले, कहत हैं कवि मसान।।

जय हनुमाना सब जग जाना।
तुम्हराजस सब राम बखाना।।1
पवन पुत्र अंजनि के लाला।
लाल नयन अरु भुजा विशाला।।2
बज्र देह दारुण दुख हरता।
संतन को तो सब सुख करता।।3
सियाराम के नित गुण गाते।
प्रभु की भक्ती में सुख पाते।।4
सुंदर तन मानव कल्याणी।
भूत प्रेत भागे सुन वाणी।।5
चैत्र पूर्णिमा को अवतारे।
मातु अंजनी राज दुलारे।।6
भक्तों के सब काम संभारे।
ले सोटा दुष्टो को मारे ।।7
विद्यावाना तुम बलधारी।
हे ब्रह्मचारी कृपा तुम्हारी।।8
दुष्ट संहारक कपि त़नुधारी।
जग उपकारी महिमा भारी।।9
रक्षक संतन दुष्ट निकंदन।
हे जग वंदन मारुति नंदन।।10
सब दुख हरते राम सुमरते।
कष्ट निवारण जग में फिरते।।11
देश विदेशा मंदिर भारी।
करते दर्शन भगत हजारी।।12
दक्षिण दिशि में रहती मूरत।
लंका विजया तेजा सूरत।।13
शनिदेवा की करी सहाया।
ऐसा जस भी जग में पाया।।14
अजरअमर अविनाशी दाता।
गुण के सागर हरते त्राता।।15
गूगल दीप तुम्हें चढ़ाते।
चना चिरोंजी भोग लगाते।।16
तुलसी ने चालीसा गाया।
बाहुक पीड़ा हार बनाया।।17
सुंदर कांडा कीरति गाई।
सार सार चालीसा भाई।।18
हे उपकारी लाल लंगोटा।
दुष्ट रोग को मारो सोंटा।।19
जो नित उठ चालीसा गावे।
सुख संपत्ति अरु बल पावे।।20
अब तो देव आन दिखाओ।
कोरोना को मार भगाओ।।21
शेष बाद में…………

23, गवलीपुरा आगर, (मालवा) मध्यप्रदेश

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