भीमाबाई होल्कर चालीसा

डॉ. दशरथ मसानिया, शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र।

होलकरों के वंश में,भीमा बेटी नाम।
मातृभूमि रक्षा करी,कहत हैं कवि मसान।।

इंदौर राज बहुत पुराना।
धनदौलत से भरा खजाना।।1
राव मल्हार बड़े महाराजा।
जनहित में करते थे काजा।।2
खांडे रावा पुत्र कहाये।
कुंभेर युद्ध वीर गति पाये।3
मालेराव अहिल्या बाई।
संयम नियमा धरम दुहाई।।4
तीस बरस तक राज चलाया।
नारी शक्ति रूप दिखाया।।5
काशि तुकोजी अरु यशवंता।
वंश होल्कर राज करंता।।6
सत्रह सौ पिंचाणू आई।
बीस सितंबर मिली बधाई।7
यशवंत राव बेटी पाई।
सकल राज में खुशियां छाई।।8
सुता लाड़ली रूप सलोना।
घोड़ा सैनिक खेल खिलोना।9
बालपने मे शिक्षा पाई।
भाष मराठी मां से आई।।10
हिन्दी उर्दू फारस सीखी।
घुड़ सवारी कटारें तीखीं।।11
अट्ठारह सौ नौ शुभ आई।
महलों में जब खुशियां छाई।।12
माहेश्वर को खूब सजाया।
बेटी का जब ब्याह रचाया।।13
राव बोलिया गोविंद नामा।
भीमा हो गइ उनकी वामा।।14
नियम धरम से सब सुख आये।
खुशी खुशी सब समय बिताये।15
एक पूत चिम्माजी जाया।
सकल परिवार हरष मनाया।।16
समय काल ने पलटा खाई।
आछे दिन सब भये बिदाई।।17
अट्ठार सौ पंद्रह दुखदाई।
गोंविंद राव स्वर्ग सिधाई।18
इधर पिताजी स्वर्ग सिधारे।
राज होल्कर भये दुखारे।।19
भीतर कलाह बाहर आई।
शत्रु ने भी अवसर पाया।।20
सेनापति षडयंत्र रचाया।
अंग्रेजो के लोभ में आया।।21
सन अट्ठारह सत्रह आया।
महिदपुर कुरुक्षेत्र बनाया।।22
राजवंश की सेना हारी।
खूब लड़ी थी तुलसी नारी।।23
जब रानी ने धोखा खाया।
दुश्मन ने झट शीश उड़ाया।।24
विपद देख भीमा गुर्राई।
फिर दुर्गा का रूप बनाई।।25
कफन बांध किरपाण चलाई।
रणचंडी बन मार मचाई।।26
शिपरा तट पे सबने देखा।
मरते सैनिक यम ने लेखा।।27
थोड़ी तोपें बंदुक धारी।
पच्चिस सौ लश्कर लाचारी।।28
बीस बरस की भीमा बाई।
घोड़ा को आकाश उड़ाई।।29
दोनों हाथन करे लड़ाई।
मार भेड़िया दूर भगाई।।30
अंग्रेजों के चमचे आये।
सूंघ सूंघ के भेद बताये।।31
मंदसौर संधी करवाई।
सुनके भीमा फिर गुर्राई।।32
बेटी थी वह देश दिवानी।
शर्ते उसने एक न मानी।।33
दुश्मन चारो तरफ दिखाई।
देखत हार पिछारी आई।34
फिर भी रानी हार न मानी।
नया दाव फिर रची कहानी।।35
इक छोटी सी फौज बनाई।
वीर शिवा सा युद्ध रचाई।।36
छापा मारी लड़ी लड़ाई।
अंग्रेजों को नाच नचाई।।37
गोला बारुद चौकी लूटे।
शत्रू दल के छक्के छूटे।।38
अंत समय जब देखा भाई।
कर्नल मलकस हाथ न आई।।39
जय जय बेटी भीमा बाई ।
साहस की जग करे बड़ाई।।40

नमन करुं वीरांगना,बेटी का गुणगान।
जीवन का पथ सिखा गइ,देशप्रेम बलिदान।।

23, गवलीपुरा आगर, (मालवा) मध्यप्रदेश

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