राष्ट्रीय साझा काव्य संकलन काव्यांगन का विमोचन हुआ

निक्की शर्मा “रश्मि”, शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र।
साहित्य साधक (अखिल भारतीय साहित्यिक मंच, सहरसा; बिहार) द्वारा राष्ट्रीय स्तर के रचनाकारों की कविताएं पर आधारित एक साझा काव्य संकलन काव्यांगन का प्रकाशन हुआ। काव्यांगन का संपादन शशिकांत शशि तथा कृष्ण कुमार क्रांति ने किया। इस पुस्तक का प्रकाशन रंगमंच पब्लिकेशन राजस्थान द्वारा किया गया है।
जूम एप के द्वारा ऑनलाइन इस साझा काव्य-संकलन काव्यांगन का विमोचनकृष्ण कुमार क्रांति के दीप प्रज्ज्वलन तथा शंखनाद से कार्यक्रम का प्रारंभ हुआ। मंच की अध्यक्षता डॉ. राणा जयराम सिंह “प्रताप” ने की तथा मुख्य अतिथि डॉ रामनाथ साहू ननकी थे । गणपति वंदना कल्पना निर्मल तथा सरस्वती वंदना सपना सक्सेना दत्ता के द्वारा प्रस्तुत की गई। जागृति श्रीवास्तव के नृत्य से मंच झूम उठा। व्यंजना आनंद द्वारा मंच का बेहतरीन संचालन किया गया। इस साझा संकलन के रचनाकारों द्वारा अपनी-अपनी एक- एक कविता पढ़ी गई। कृष्ण कुमार क्रांति ने निर्भया की संवेदना पर अपनी कविता में लिखा – “आज पावन हुआ विहान चढ़ गए सूली शैतान, निर्भया को न्याय मिला जीत गया है स्वाभिमान“।
अनुश्री की कविता- तुम नारी को अपनी शक्ति का एहसास दिलाती हुई रचना है।  अमर सिंह निधि ने “चेहरे” शीर्षक से अपनी कविता में बताया- “कितने मासूम से होते हैं चेहरे। कितनी हकीकत छुपाते हैं चेहरे।।” सपना सक्सेना दत्ता ने  कहा– “बहुत दिनों के बाद मिले हो, सच बतलाओ कैसे हो ?” राधा तिवारी राधेगोपाल की रचना, “देश निकाला” में कोरोना महामारी पर व्यंग्यात्मक लेखनी चली- “राम के दर पर आज लगा है ताला क्यों?”
बहुचर्चित कवि शशिकांत शशि ने अपनी मानवीय संवेदना पर अपनी कविता “फर्ज”  के द्वारा बताया कि गरीबी के झंझावातों में घिरा हुआ इंसान, कभी पिता, कभी पुत्र तो कभी पति के रूप में फर्ज के सलीब पर टंगा हुआ नजर आता है। साहित्य के जाने-माने हस्ताक्षर डाॅ. राणा जयराम सिंह ‘प्रताप’ की मार्मिक और विशुद्ध साहित्य कविता “मां” सचमुच हृदय को झकझोर गई। अन्य साहित्यकारों में वशिष्ठ प्रसाद, अलका जैन आनंदी, रितु प्रज्ञा, जितेंद्र कुमार वर्मा, संतोष सिंह हसौर, पंकज बजाज आदि ने भी अपने काव्य पाठ से मंच पर खूब तालियां बटोरीं। काव्यांगन लोकार्पण कार्यक्रम में बिलासा साहित्य धारा मंच के जाने-माने साहित्यकारों द्वारा भी काव्य पाठ एव बाल कलाकारों द्वारा मनमोहक नृत्य प्रस्तुतियां दी गई। बाल कलाकारों में क्षितिजा मोरे, इशिता शर्मा, कुमार चिन्मय, नेहा बडगूजर, जागृति श्रीवास्तव, नव्या कुमारी, शिवानी कुमारी, सुमन कुमार एवं अमन कुमार एवं राष्ट्रीय कार्यालय सचिव दिनेश कुमार पाण्डेय शामिल हुए।
कार्यक्रम में सभी साहित्यकारों, समारोह सहयोगी एवं बाल कलाकारों को काव्यांगन लोकार्पण प्रतिभागिता सम्मान से भी नवाजा गया। साहित्य साधक मंच के मित्र संगठन बिलासा साहित्य संगीत धारा मंच के संरक्षक और कार्यक्रम के मुख्य अतिथि रामनाथ साहू ननकी ने सभी प्रतिभागियों को शुभकामना संदेश प्रेषित किया। अध्यक्षीय उद्बोधन में डाॅ. राणा जयराम सिंह प्रताप ने कहा काव्यांगन में शामिल सभी रचनाकार बेहतरीन संवेदनाओं के कवि हैं। डॉ राणा ने कहा कि इस कोरोना काल में भी काव्यांगन का प्रकाशन इसके संपादक द्वय शशिकांत शशि तथा कृष्ण कुमार क्रांति की साहित्यिक जिजीविषा का परिचायक है। वे दोनों इसके लिए बधाई के पात्र हैं। उन्होंने बताया कि साहित्य को समाज की मुख्यधारा में लाने का प्रयास भी हम सभी कलमकारों को करना चाहिए।

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