भीमराव चालीसा (जन्म दिवस 14 अप्रैल पर विशेष) 

डॉ. दशरथ मसानिया, शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र।

बुद्धि विद्या अर्जित करि, बने बुद्ध अवतार।
जग के हितकारी भये, कहें मसान विचार।।
जय जय बाबा भीमा प्यारे।
तुमने लाखों जीवन तारे।।1
भूले बिसरों को अपनाया।
मानवता का पाठ पढ़ाया।।2
मालव माटी मउ है प्यारी ।
जाकी महिमा जग से न्यारी।।3
सन् अट्ठारह सौ इंकाणू ।
चौदह अप्रैल सदा बखानू।।4
भीमा भाई भीमा जाये।
पिता राम सकपाल कहाये।।5
जन्मे भीमा भर किलकारी।
देव अंश मानव अवतारी ।।6
जब भीमा ने सुधबुध पाया।
शाला में उनको भिजवाया।।7
लिखते पढ़ते शाला जाते ।
भूख प्यास को भी विसराते।।8
कक्षा में भी नाम कमाते।
नवाचार नव तेज दिखाते।9
बालपने में प्रश्न अनेका।
सबका उत्तर शिक्षा देखा।।10
सरस्वती की किरपा भारी।
विद्या के थे तुम अधिकारी।।11
सकापाल उपनाम हटाया।
फिर उप अंबेडकर लगाया।।12
स्कूल शिक्षा पूरी कीनी ।
फिरआगे की भी सुध लीनी।13
राज बड़ोदा मदद दिलाई।
कोलंबिया में करी पढ़ाई।।14
लंदन मे विधि शिक्षा पाई।।
चार उपाधी डाॅक्टर आई।।15
अर्थ राज विधि विज्ञाना।
किया शोध तब भये सयाना।।16
तुमसा कौन जगत में ज्ञानी।
भारत प्रतिभा जग ने मानी।।17
ज्योति फुले ने बात बताई।
जीवन भर तुमने अपनाई।।18
शिक्षा जीवन का रस भारी।
जिसने पाई वहि अधिकारी।19
विद्या  से  पद  पैसा पाते ।
नीचे भी ऊंचे बन जाते ।।20
अर्थशास्त्र  प्रोफेसर  पाई।
राजनीति भी तुमको भाई।।21
छोड़ नौकरी करी वकालत।
शोषित के हित गये अदालत।।22
मूक नायक  पत्र  चलाई।
वंचित पीड़ित व्यथा बताई।।23
पांच पत्र संपादन कीना।
जन जन की पीढ़ा को चींहा।।24
पच्चिस दिस सत्ताइस आया।
क्रांति का जब शंख बजाया।।25
सामाजिक समता अपनाया।
गांव गांव में अलख जगाया।।26
छोड़ कुरीती नीति बनाया।
शिक्षा का अधिकार दिलाया।।27
बुद्धम शरणम् धरम विचारा।
जाति पांति का मेटन हारा।।28
बुद्ध ज्योति बा संत कबीरा।
तीनों मानव हरते  पीरा।।29
बाबा इनका पथ अपनाया।
नर नारी का भेद मिटाया।।30
तुमसा कौन जगत में दानी।
भाषाविद् जनजन कल्याणी।।31
तुमको जनजन शीश नमाता।
ज्ञानी ज्ञाता भाग्य विधाता।।32
सूरज जैसे ज्ञान प्रकाशा।
सारे जग की तुम ही आशा ।।33
दीन दुखी का बने सहारा।
अनजाने को भी तुम तारा ।।34
सादा जीवन उच्च विचारा।
बाबा साहब नाम हि प्यारा।।35
मानवता के तुमहि पुजारी।
सारी दुनिया तुमसे हारी ।।36
ज्ञान दीप प्रकाश के पुंजा।
मेट अंधेरा छोड़े फंदा।।37
छे दिसम्बर छप्पन आई।
बाबा ने जब लई विदाई।।38
सन नब्बे में शुभ दिन आया।
भारत रतन सम्मान कमाया।।39
जयजय भीमा बुध अवतारी।
ज्ञाता कानुन समता धारी।।40
भारत के संविधान का,कीना तुम निर्माण।
वंचित का उत्थान करि,कहत हैं कवि मसान।।
23, गवलीपुरा आगर, (मालवा) मध्यप्रदेश

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