क्षणिक

विनय सिंह “विनम्र”, शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र।

मैं कभी किसी से गिला नहीं करता,
ये जीवन है क्षणिक सिलसिला नहीं करता,
अभी हवा जो गुजरते हुये कुछ कह गयी,
बीतते परिदृश्य में उसका आसरा नहीं करता।
क्यों खफा होना किसी पे रुठना मुझको,
साथ अपनों का भी एक दिन छूटना तय जो,
सूर्य की रश्मियाँ भी कह गयी देखो विनम्र”
सुबह की धूप ढलकर हीं ये मेरा शाम कर गयी।
ग्राम मझवार खास, चन्दौली उत्तर प्रदेश

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