हृदय

वाणी बरठाकुर ‘विभा’, शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र।

मेरे अंदर से
तू हर वक्त बतलाता
धड़कन बन
अहसास जताता
मैं जिन्दा हूँ,
सोचना समझना
कभी कई राह
तू ही दिखाया ।
मैं जानती हूँ
हृदय
यह तेरा ही खेल है
गम में आँसू
और खुशी में
मुस्कुराहट सजाना ।
तूने अटूट बंधन से
अटल विश्वास संग
हृदय से हृदय का
गठबंधन कर दिया
यह भी
मुझे पता है
यह तेरा ही खेल है
एक-दूसरे को
सुख दुख की सहभागी
बना डाला ।
आज अशांत हृदय
लाशों के ढेर देख
धीमी गति से
धड़क रहा
खुशियों के धागे
जैसे टूट गया।
मानव क्रंदन सुनकर
हृदय नाकाम हो चला ।
जब से न कर पाया
मुक्त मन से विचरण
गले लगाना
दूसरों के सुख-दुख में
एक होकर शामिल होना
हृदय चुपके से
आँसू बहाता ।
हृदय तू ही बता
एक बार  ,
जो गलती प्रकृति पर
मानव ने की
उसके लिए
क्या देना है
दोषी और निर्दोष को
एक ही सजा !
एकबार जा
दरिंदों के अंदर
धड़कन बन
परिवर्तित कर
उनके हृदय ।
तेजपुर, असम

Related posts

Leave a Comment