तो इसलिए समृद्ध हैं गुजराती कुर्मी पटेल

एमए पटेल, शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र।

गुजरात के कुर्मी हाईली एज्युकेटेड हैं। करीब हर घर में एक बेटी या बहू ग्रेजुएट है। 100 साल पहले समाज ने शिक्षण का आंदोलन शुरू किया था कि कुछ हो या न हो, कुर्मियों के गांव में स्कूल ज़रूर होगा। शिक्षित होने के कारण गुजरात के कुर्मी पटेल सामान्यतः व्यसन मुक्त है। वे मांसाहार नहीं करते। हाँ! कहीं-कहीं अंडे खाने का प्रचलन अब शुरू हुआ है। गुजरात के कुर्मी पटेल अंध श्रद्धालु नहीं हैं, लेकिन वे पूरी तरह से आध्यात्मिक और श्रद्धालु हैं। वो सिर्फ अपने बारे में नहीं, अपितु पूरी जीव सृष्टि के बारे में सोचते हैं। गुजरात के हर कुर्मी गांव में भगवान् राम, शिवजी भगवान्, वैष्णव या उमा, खोडल व अन्नपूर्णा देवी का मंदिर ज़रूर होगा।
कुर्मी पटेल के प्रत्येक गांव में एक मंदिर, पक्षियों के भोजन के लिए चबूतरा, सुबह भजनों के साथ प्रभातफेरी करके पक्षियों  के लिए धान एकत्रित करके चबूतरे पे डालना आम बात है। कहीं-कहीं कुत्तों के भोजन के लिए खेती की जमीन का भूदान भी करते है, जिसे कुतरीया खेत बोलते है। मेरे पूर्वजो ने भी ऐसे दान दिये है। गांवों मे गायों के चरने के लिए गोचर जमीन भी होती  है। गुजराती कुर्मी कभी भिख मांगने का काम नहीं कर सकता। वो हर समाज यहाँ तक कि चींटी आदि हर पशु-पक्षी को कुछ न कुछ देने का काम करता है।
कुर्मी स्वाभमानी कौम हैं और उच्चवंशज है। गुजराती कुर्मी आमतौर शांति प्रिय है। जहां तक संभव होता है वह एक बार मार खा कर भी झगडा टालने का प्रयास करता है। इसके बाद भी अगर कोई नहीं मानता है तो फिर उसे अच्छी तरह सबक भी सिखाने का काम कुर्मी कर ही देता है। गुजराती कुर्मी को दूसरों को खिलाने और समूह भोजन मे ख़ुशी होती है। गुजराती कुर्मी में पारिवारिक भावना अधिक होती है। 2015 में हुए ओबीसी अनामत आंदोलन के दौरान गुजरात की सभी प्रमुख कुर्मी संस्थाओ, जैसे- ऊमिया माताजी संस्थान ऊंझा, खोडलधाम, सरदारधाम, अन्नपूर्णा धाम, समस्त पाटीदार समाज सुरत के प्रमुख कार्यकर्ताओं ने “सरदार पटेल नेशनल मेमोरियल” अहमदाबाद में एक दिवसीय चिंतन शिविर में “ओबीसी अनामत मांग” का स्पष्ट विरोध किया था, जिसकी मिडिया ब्रीफिंग खुद मैने की थी।
सामान्यतः कुर्मी समाज में चोरी, लूंटफाट, बलात्कार या जेलवास निंदनीय है। सरदार साहब ने हमें अनामत नहीं दी थी, इसलिए हम नौकरी ढूंढने वाले बनने के बजाय, सभी व्यापार व उद्योगों में जहाँ कहीं भी जगह मिली, वहां घुस गये और नौकरी देने वाले बन गये। आज हालत ये है कि गुजरात के करीब 20% कुर्मी पटेलों ने अपनी मेहनत और ईमानदारी से करीब हर क्षेत्रों पर कब्जा प्राप्त किया है। कृषि के उपरांत, शिक्षण, डायमन्ड, ज्वेलरी, फार्मेसी, रीयल एस्टेट, बांधकाम, केमिकल, सिरामिक, कुरियर, आंगणीया सर्विस, व्यापार आदि करीब हर क्षेत्र में गुजरात के कुर्मी पटेल का ज्यादातर हिस्सा है, शायद इसलिए ब्राह्मण और बनिये जैसे तथाकथित हाईकास्ट लोग अपनी बेटी कुर्मी पटेल युवको को देने में गर्व महसूस करते हैं, जबकि आजादी से पहले ये स्थिति नहीं थी। आज कुर्मी अपने संबंधी से मिलकर 1% या 2% मूडी लगाकर कंपनी बनाते है या कोई बिजनेस करते हैं और खुद अपनी कंपनी में नौकरी भी करते हैं। शायद यही गुजराती कुर्मी पटेल की खुशहाली और उन्नति का राज है।
अध्यक्ष गुजरात प्रदेश कुर्मी पाटीदार महासभा ट्रस्ट 

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