फुर्सत के पल

अर्चना त्यागी, शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र।

आओ फिर से सोचें हम,
एक पल खुद के बारे में।
क्यों उजड़ी सब खुशियां,
स्वार्थ के इस गलियारे में।
क्या छूटा, क्या खो गया,
अहम के बजते नगाड़े में।
आओ फिर से साथ चलें,
इस मौसम के नज़ारे में।
वो प्रेम कहां है खो गया,
क्रोध के दहकते अंगारे में।
थोड़ी फुर्सत सी निकालें,
तलाशें प्रेम, दिल बंजारे में।
व्याख्याता रसायन विज्ञान एवम् कैरियर परामर्शदाता B-50 अरविंद नगर (जोधपुर) राजस्थान

Related posts

Leave a Comment