परीक्षा में सफल कैसे हो? स्वयं द्वारा निर्मित एक कोरी कल्पना मात्र है एक्जामिनेशन फीवर

डा0 जगदीश गांधी, शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र। 

प्रायः यह देखा जाता है कि परीक्षा के नाम पर ही छात्रों को हताशा घेर लेती है, जबकि जीवन की समृद्धि एवं विकास के लिए परीक्षा एक आवश्यक उपकरण माना गया है। अतः जैसे ही हमने जीवन में परीक्षा की अनिवार्यता को स्वीकार किया, वैसे ही हमारी सफलता दोनों क्षेत्रों अर्थात स्कूल तथा जीवन में सुनिश्चित हो जाती है। एक्जामिनेशन फीवर स्वयं द्वारा निर्मित एक कोरी कल्पना मात्र है। जैसे ही हम परीक्षा के विषय में गम्भीर होते हंै वैसे ही हमारी उदासीनता के बादल छट जाते हैं। असफलता का डर मन से हटाते ही हमारे अंदर की असीम शक्ति प्रकट हो जाती है।

टेस्ट, एस्समेन्ट, मूल्यांकन, अर्द्धवार्षिक तथा वार्षिक परीक्षायें, बोर्ड परीक्षायें, प्रवेश परीक्षायें, तुलनात्मक परीक्षाएं आदि आधुनिक छात्र जीवन का एक हिस्सा है। यह एक सच्चाई है कि जीवन किसी को भी परीक्षा से बचने की छूट नहीं प्रदान करता। फिर क्यों नहीं हम इसे जीवन की एक सच्चाई के रूप में स्वीकार करके इसके साथ अपनी पूरे प्रयत्न के साथ जीने का साहस करें। हमारी सफलता का टेस्ट परीक्षा कक्ष में होता है। यदि हम सफलता के प्रति गम्भीर है तो क्यों नहीं हम अपनी परीक्षा की तैयारी वैज्ञानिक ढंग से करें?

यदि हमारा अपने पर विश्वास नहीं है तो समझे कोई भी हम पर विश्वास नहीं करेगा। ईश्वर ने हमें सुपर कम्प्यूटर से भी अधिक आधुनिक तथा तेज गति वाला मस्तिष्क दिया है। जैसे कि सुपर कम्प्यूटर का उपयोग एक तीव्र गति से एक अच्छा परिणाम देने के लिए किया जाता है। उसी प्रकार के आश्चर्यचकित कर देने वाले परिणाम हम अपने मस्तिष्क का सही उपयोग करके दे सकते हैं। जीवन में कुछ भी असम्भव नहीं है। अगर आपने अपनी परीक्षा से पहले अपने सभी विषयों की तैयारी करने के लिए अपने मस्तिष्क को तैयार कर लिया तो आप अवश्य सफल होंगे।

परीक्षा के विभिन्न प्रश्न पत्रों की तैयारी उसी तरह से करना चाहिए जिस प्रकार आप किसी यात्रा या छुट्टी पर जाने से पहले करते हो। किसी यात्रा पर जाने के लिए गन्तव्य स्थान का प्रारम्भिक ज्ञान उसकी कुंजी है। हमें यह ज्ञान होना चाहिए कि हम कहाँ जा रहे हैं? एक बार यदि हमें अपना लक्ष्य ज्ञात हो गया तो हम स्वयं उस लक्ष्य की तरफ मुड़ जाएंगे। यदि हमारा लक्ष्य परीक्षा में 100 प्रतिशत अंक लाना है तो पाठ्यक्रम में दिये गये निर्धारित विषयों के ज्ञान को पूरी तरह से समझकर आत्मसात करना होगा।

प्रत्येक मनुष्य की स्मरण शक्ति असीमित है। मनुष्य में सारे ब्रह्याण्ड का ज्ञान अपने मस्तिष्क में रखने की क्षमता होती है। छात्रों को अपने पढ़े पाठों का रिवीजन पूरी एकाग्रता तथा मनोयोगपूर्वक करके अपनी स्मरण शक्ति को बढ़ाना चाहिए। यह एक सत्य है कि स्मरण शक्ति एक अच्छा सेवक है इसे अपना स्वामी कभी मत बनने दो। आइस्टीन जैसे महान वैज्ञानिक तथा एक साधारण व्यक्ति के मस्तिष्क की संरचना एक समान होती है। केवल फर्क यह है कि हम अपने मस्तिष्क की असीम क्षमताओं की कितनी मात्रा का निरन्तर प्रयास द्वारा सदुपयोग कर पाते हैं।

सिर्फ महत्वपूर्ण विषयों या प्रश्नों की तैयारी करने की प्रवृत्ति आजकल छात्र वर्ग में देखने को मिल रही है। अगर आपका लक्ष्य 100 प्रतिशत अंक अर्जित करना है तो परीक्षा में आने वाले सम्भावित प्रश्नों के उत्तरों की तैयारी तक ही अपना अध्ययन सीमित न रखे। सम्पूर्ण पाठ्यक्रम से सभी प्रश्नों के उत्तरों की तैयारी करना एक अच्छी आदत है। जो छात्र पाठ्यक्रम के कुछ भागों को छोड़ देते हैं, वे परीक्षा में असफलता का मुँह देख सकते हैं।

आपने जो कुछ अपने निर्धारित विषयों में पढ़ा है उसमें से ज्यादा से ज्यादा प्रश्नों के उत्तरों को पूछना एक परीक्षक की प्रवृत्ति होती है। इसलिए पाठ्यक्रम के प्रत्येक पहलू के लिए अपनी योग्यता का संतुलित विकास करना जरूरी है। विषयों को समझने का अर्थ वह शक्ति और क्षमता है जो आपने अपने भावी जीवन के लिए ‘आत्मसात’ किया है। आपका विषयों को समझना तब तक सार्थक नहीं जब तक आपने उन विचारों से अपने जीवन को ओतप्रोत नहीं किया है।

किसी ने सही ही कहा है कि ‘करत-करत अभ्यास से जड़मत होत सुजान, रसरी आवत जात है सिल पर पड़त निशान’ अर्थात् जिस प्रकार एक मामूली सी रस्सी कुएँ के पत्थर पर प्रतिदिन के अभ्यास से निशान बना देती है उसी प्रकार अभ्यास जीवन का वह आयाम है जो कठिन रास्तों को भी आसान कर देता है। इसलिए अभ्यास से कठिन से कठिन विषयों को भी याद किया जा सकता है। इस प्रकार सफलता की एकमात्र कुंजी निरन्तर अभ्यास, अभ्यास और अभ्यास ही है। विशेषकर गणित तथा विज्ञान विषयों में यदि आप अपना वैज्ञानिक एवं तार्किक दृष्टिकोण विकसित नहीं कर पाये तो आप सफलता को गवां सकते हैं। इसलिए इन विषयों के सूत्रों को अच्छी तरह से याद करने के लिए इन्हें बार-बार दोहराना चाहिए और लगातार इनका अभ्यास भी करते रहना चाहिए।

प्रायः देखा जाता है कि अधिकांश छात्र अपना सारा समय उन प्रश्नों में लगा देते हैं, जिनके उत्तर उन्हें अच्छी तरह से आते हैं। तथापि बाद में वे शेष प्रश्नों के लिए समय नहीं दे पाते। समय के अभाव में वे जल्दबाजी करते प्रायः देखे जाते हैं और अपने अंकों को गॅवा बैठते हैं। परीक्षाओं में इस तरह की गलती करना छात्र वर्ग की सामान्य प्रवृत्ति बन गयी है। इसलिए छात्र अपने सभी प्रश्नों के उत्तर समय के भीतर लिख सके, इसके लिए समय प्रबन्धन अत्यन्त ही जरूरी है।

आपकी उत्तर पुस्तिका को चैक करने वाले परीक्षक पर सबसे पहला अच्छा या बुरा प्रभाव आपकी लिखावट का पड़ता है। परीक्षक के ऊपर सुन्दर तथा स्पष्ट लिखावट का बहुत अच्छा प्रभाव पड़ता है। परीक्षक के पास अस्पष्ट लिखावट को पढ़ने का समय नही होता है। अतः परीक्षा में उच्च कोटि की सफलता के लिए अच्छी लिखावट एक अनिवार्य शर्त है।

सही स्पेलिंग तथा विराम चिन्हों का सही उपयोग का ज्ञान होना हमारे लेखन को प्रभावशाली एवं स्पष्ट अभिव्यक्ति प्रदान करता है। भाषा का सही प्रस्तुतीकरण छात्रों को अच्छे अंक दिलाता है। विशेषकर भाषा प्रश्न पत्रों में सही स्पेलिंग अति आवश्यक है। इसी प्रकार विराम चिन्हों का सही उपयोग भी अच्छे अंक अर्जित करने के लिए जरूरी है।

प्रत्येक व्यक्ति को जीवन में चुस्त, तरोताजा, निरोग एवं फुर्तीला बने रहने के लिए रोजाना कम से कम आधा घण्टा शारीरिक व्यायाम, योग आदि अवश्य करना चाहिए। ऐसा स्वभाव विकसित करने से हमारे शरीर एवं मस्तिष्क दोनों स्वस्थ रहते हैं। किसी ने बिलकुल सही कहा है कि एक स्वस्थ शरीर में स्वस्थ मस्तिष्क निवास करता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों एवं डाक्टरों के अनुसार प्रतिदिन लगभग 7 घण्टे बिना किसी बाधा के चिंतारहित गहरी नींद लेना सम्पूर्ण नींद की श्रेणी में आता है।

इसके साथ ही सभी छात्रों को परीक्षा की तैयारी के दौरान निम्न बातों का ध्यान अवश्य रखना चाहिएः-

(1)          पढ़ाई के दौरान हर 2 घंटे पर लें ब्रेक।

(2)          ब्रेक के दौरान खेल या कोई भी फिजकिल एक्टिविटी करें।

(3)          माइंड फ्रेश करने के लिए म्यूजिक भी सुन सकते हैं।

(4)          खानपान हल्का रखें, एक बार में खाने की बजाय 3-4 बार खाएं।

(5)          सुबह के वक्त याद करने वाली चीजों को दें अधिक वक्त।

(6)          हर विषय के लिए निर्धारित करें समय।

(7)          देर रात तक पढ़ने से बचें

(8)          अपने मस्तिष्क की असीम क्षमता का सदुपयोग करें व लिखकर याद करने की आदत डालें।

(9)          सम्पूर्ण पाठ्यक्रम का अध्ययन जरूर करें।

(10)        उच्च कोटि की सफलता के लिए समय प्रबन्धन जरूरी।

(11)        सुन्दर लिखावट, सही स्पेलिंग तथा विराम चिन्हों का प्रयोग करें।

(12)        प्रवेश पत्र के साथ ही अच्छे पेन, पेन्सिल, स्केल, रबर, कलाई घड़ी आदि सामान सुरक्षित रखें।

(13)        प्रश्न पत्र के निर्देशों को भली-भांति समझ लें।

(14)        उत्तर पुस्तिका को जमा करने के पूर्व उसे चेक अवश्य करें।

(13) मैं यह कर सकता हूँ, इसलिए मुझे करना है:-

छात्र को अपने आत्मविश्वास को जगाने के लिए इस वाक्य को प्रतिदिन अधिक से अधिक से दोहराना चाहिए कि ‘मैं यह कर सकता हूँ, इसलिए मुझे यह करना है’ यह छात्र जीवन में उच्च कोटि की सफलता प्राप्त करने का एक अचूक मंत्र हो सकता है। यह मंत्र जीवन में पूरी तरह तभी सफल होगा जब हम अपने अंदर एकाग्रता, निरन्तर प्रयास, आत्मानुशासन तथा आत्म-नियंत्रण के गुणों को भी विकसित करेंगे। परीक्षाओं के समय यह वाक्य हमारी सुनिश्चित सफलता की सोच को विकसित करता है।

संस्थापकप्रबन्धक सिटी मोन्टेसरी स्कूल लखनऊ उत्तर प्रदेश 

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