लोगों का काम है कहना

कुंवर आरपी सिंह, शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र।

एक मकड़़ी ने रहने और शिकार के लिए शानदार जाला बनाने की सोंची। उसने सपना देखा कि जाले में खूब कीड़े मच्छर, मक्खियाँ फँसा करेंगी और वह उन्हें मजे से आहार बनायेगी। उसने घर के एक कोने में जाला बुनना शुरू किया, तभी उसकी नज़र एक बिल्ली पर पड़ी जो उसे देखकर हँस रही थी। उसने बिल्ली से हँसने का कारण पूँछा तो बिल्ली बोली-यहाँ मक्खियाँ तो हैं नहीं, कौन फँसेगा तेरे जाल में? मकड़ी ने वह जाला अधूरा छोड़कर एक खिड़की में जाला बुनना शुरू किया। तभी एक चिड़िया आई और बोली-तू भी कितनी बेवकूफ है, यहाँ तो तेज हवा आती है, जाले के साथ तू भी उड़ जायेगी। अब मकड़ी ने एक अलमारी के खुले दरवाजे पर जाला बुनना शुरू किया। कुछ ही जाला बुना था कि एक काक्रोंच आ पहुँचा उसने कहा-ये तो बेकार अलमारी है, कुछ ही दिनों में इसे बेंच दिया जायेगा और तुम्हारी सारी मेहनत बेकार हो जायेगी। मकड़़ी ने वह जाला भी अधूरा छोड़कर पास से गुजर रही चींटी से मदद की गुहार लगाई। चींटी ने कहा-तू बार-बार अपना काम शुरू करती है और दूसरों के कहने पर उसे अधूरा छोड़ देती है। जो सदैव दूसरों के कहने में चलते हैं, वो कुछ नहीं कर सकते। यह कहकर चींटी अपने रास्ते चली गई और मकड़ी पछताती हुई निढा़ल होकर गिर पड़ी। इन्सान की जिन्दगी में भी कई बार ऐसा होता है। वह उत्साह से किसी काम को शुरू तो करता है, लेकिन लोगों की टोंका-टाकी, छींटाकसी, नुक्ताचीनी की वजह से भ्रमित होकर उत्साह गवाँकर हौसला खो देता है और काम औंर इरादा बीच में छूट जाता है, जबकि होना यह चाहिये कि दृढ़ इरादों के साथ “सुनो सबकी, करो मन की” तर्ज पर अपना मिशन पूर्ण करना चाहिये। जो उचित राय दे और उचित लगे ,उसे भी अपनाना दिमाग की बात है।

राष्ट्रीय अध्यक्ष जय शिवा पटेल संघ

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